जागरुकता जरुरी

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Edited By Amrit Vichar
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारें अधिक निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहती हैं तो कोविड- 19 महामारी ‘बद से बदतर’ स्थिति में पहुंच जाएगी। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कई देश कोरोना से निपटने के मामलों में गलत दिशा में जा रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व …

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारें अधिक निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहती हैं तो कोविड- 19 महामारी ‘बद से बदतर’ स्थिति में पहुंच जाएगी। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. ट्रेडोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कई देश कोरोना से निपटने के मामलों में गलत दिशा में जा रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि इस सप्ताह देश में कोरोना मामलों का आंकड़ा 10 लाख पार कर जाएगा।

उधर केन्द्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में कोरोना वायरस‘कोविड-19’ की जांच कम नहीं हो रही हैं और यह डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही की जा रही हैं। मरीजों की जांच करने का भारत का औसत 210 मरीज प्रति दिन प्रति 10 लाख व्यक्ति है। मिजोरम जैसे छोटे राज्य में यह 149 हैं तो दिल्ली में कोरोना मरीजों की प्रति 10 लाख आबादी पर होने वाली जांच का आंकड़ा 978 है तथा गोवा में यह आंकड़ा 1058 मरीजों का है। तमिलनाडु में 563 और महाराष्ट्र में 198 लोगों की प्रति दिन प्रति 10 लाख आबादी पर जांच की जा रही है।

साथ ही उच्चतम न्यायालय ने देश भर के निजी एवं चैरिटेबल अस्पतालों में कोरोना महामारी के इलाज की कीमत को नियमित करने को लेकर गुरुवार को याचिकाकर्ता और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ मिल-बैठकर एक मसौदा तैयार करने का केंद्र को निर्देश दिया ताकि राज्यों को उसके अनुकूल निर्देश दिया जा सके।

न्यायालय ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह सहमत है कि वर्तमान समय में मरीजों के उपचार की लागत अधिक नहीं होनी चाहिए। किसी को भी स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों से सिर्फ इसलिए दूर नहीं होना चाहिए क्योंकि उपचार की लागत अधिक है। सही बात तो यह है कि न्यायालय प्रत्येक मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता लेकिन केंद्र सरकार राज्यों से फैसला लेने के लिए कह सकती है।

देश में कोरोना जांच का दायरा बढ़ाए जाने की जरुरत है। अधिक संख्या में लोगों की कोरोना जांच होगी उतने ही संदिग्ध लोगों की जल्द पहचान होगी और उनका उपचार भी त्वरित गति से संभव हो सकेगा। साथ ही देश में स्वास्थ्य से जुड़े आधारभूत ढांचे को उन्नत करने की भी आवश्यकता है। जब तक कोरोना की कोई पुख्ता दवा या वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक सामाजिक दूरी, मुंह को मास्क या कपड़े से ढकने, हाथों को बार-बार धोने और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने जैसी आदतों में बदलाव लाना होगा तथा बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर लोगों को इसके बारे में जागरुक करना होगा।