आतंकवादियों द्वारा दो प्रवासी मजदूरों की हत्या के खिलाफ जम्मू में प्रदर्शन

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Edited By Amrit Vichar
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जम्मू। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में निशाना बनाकर हमले की ताजा घटना में आतंकवादियों द्वारा दो गैर-स्थानीय मजदूरों की हत्या किए जाने के खिलाफ अनेक दलों और संगठनों ने मंगलवार को यहां प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ये भी पढे़ें – Karnataka: हलाल उत्पादों के खिलाफ दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने शुरू किया अभियान …

जम्मू। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में निशाना बनाकर हमले की ताजा घटना में आतंकवादियों द्वारा दो गैर-स्थानीय मजदूरों की हत्या किए जाने के खिलाफ अनेक दलों और संगठनों ने मंगलवार को यहां प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

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पिछले कुछ महीनों में हुए इस तरह के हमलों के बाद दूसरी जगह बसाये जाने की मांग के साथ प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी पंडित प्रवासियों और जम्मू स्थित आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों ने कहा कि पिछले कुछ दिन में अल्पसंख्यक समुदाय के तीन सदस्यों की हत्या से घाटी में जमीनी हालात को लेकर उनकी आशंकाएं सही साबित हुई हैं। शिवसेना, राष्ट्रीय बजरंग दल और शिवसेना डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने जम्मू और उसके बाहरी इलाकों में कुछ जगहों पर प्रदर्शन किये।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज निवासी मोनिष कुमार और राम सागर की मंगलवार तड़के शोपियां जिले में आतंकवादियों ने ग्रेनेड हमला कर हत्या कर दी। तीनों उस समय अपने किराये के घर में सो रहे थे। इससे पहले शनिवार को कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट्ट की आतंकवादियों ने चौधरी गुंड स्थित उनके पैतृक आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। श्रमिकों की हत्या की निंदा करते हुए शिवसेना की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष मनीष साहनी ने सरकार पर घाटी में निशाना बनाकर हो रहे हमलों पर नियंत्रण नहीं कर पाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादी कश्मीर में 2017 से दो दर्जन से अधिक प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य सदस्यों की हत्या कर चुके हैं। केंद्र की सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन कश्मीर में काम कर रहे लोगों को सुरक्षित माहौल देने में नाकाम रहे हैं।’’ कश्मीरी पंडित प्रवासी कर्मचारियों और मई में अपने साथियों की हत्या के बाद घाटी छोड़कर चले गये जम्मू स्थित आरक्षिण श्रेणी के कर्मचारियों ने संकल्प जताया कि जब तक हालात में सुधार नहीं होता, वे घाटी में नहीं लौटेंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेश साहनी ने श्रमिकों की हत्याओं को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाएं सरकार की नाकामी दर्शाती हैं। अपनी पार्टी के महासचिव विजय बकाया ने भी घटनाओं की निंदा की।

कश्मीरी पंडित नेता बकाया ने एक बयान में कहा, ‘‘यह घटना प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की इस आशंका की पुष्टि करती है कि निशाना बनाकर हत्या करने की प्रवृत्ति रुकी नहीं है और घाटी में उनकी सुरक्षित वापसी तथा काम करने के लिए माहौल अनुकूल नहीं है।’’ उन्होंने उपराज्यपाल प्रशासन से अनुरोध किया कि मानवीय रुख अख्तियार करते हुए पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कर्मचारियों को घाटी में लौटने को बाध्य करने के लिए उनका वेतन रोकने जैसे कदम नहीं उठाये जाएं।

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