बरेली: घर से भागे या ठुकराए नाबालिगों का ठहराव रेलवे स्टेशन
माेनिस खान/बरेली, अमृत विचार। जंक्शन पर हर रोज 20 हजार से ज्यादा रेल यात्रियों का आवागमन होता है। इनमें ज्यादातर की कोई न कोई मंजिल होती है, मगर कच्ची उम्र में घर भागे या फिर किसी अपने के धोखे का शिकार हुए नाबालिगों के लिए यह महज एक ठहराव है। यह भी पढ़ें- बरेली में …
माेनिस खान/बरेली, अमृत विचार। जंक्शन पर हर रोज 20 हजार से ज्यादा रेल यात्रियों का आवागमन होता है। इनमें ज्यादातर की कोई न कोई मंजिल होती है, मगर कच्ची उम्र में घर भागे या फिर किसी अपने के धोखे का शिकार हुए नाबालिगों के लिए यह महज एक ठहराव है।
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अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक बरेली जंक्शन रेलवे चाइल्ड लाइन ने ऐसे ही 48 नाबालिगों को रेस्क्यू किया और 46 को उनके घर तक पहुंचाया। जंक्शन पर रेलवे चाइल्ड लाइन द्वारा रेस्क्यू किए गए हर नाबालिग बच्चे की अपनी कहानी है। कोई परिवार से बिछड़ा है तो किसी को उसके अपने ने ही भटकने के लिए छोड़ दिया।
कोई लड़कपन के प्रेम का शिकार होकर अपने लिए मंजिल तलाशने निकला था। इनमें से 11 बच्चों की उम्र 10 साल से भी कम है। सबसे कम्र का बच्चा रेलवे चाइल्ड लाइन ने जो रेस्क्यू किया उसकी उम्र महज दो साल है। रेलवे चाइल्ड लाइन ने सबसे ज्यादा जुलाई महीने में 15 बच्चों को रेस्क्यू कर उनके परिवार से मिलवाया। ज्यादातर नाबालिग यूपी, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड जैसे राज्यों के हैं।
सितंबर के महीने में जंक्शन पर एक विकलांग युवक दो किशोरियों जिनकी उम्र 10 व 12 साल के होगी को लेकर आता है। स्टेशन के अधिकारियों को बताता है कि यह दोनों लड़कियां उसको भटकती हुई मिलीं। इसके बाद अधिकारियों द्वारा युवक और लड़कियों को रेलवे चाइल्ड लाइन के पास भेज दिया जाता है।
युवक ने खुद को मीरगंज के ही एक गांव का रहने वाला बताया। युवक की बात सही मानकर रेलवे चाइल्ड लाइन के सदस्य दोनों किशोरियों के परिवार वालों के सुराग तलाशने में जुट जाते हैं। किशोरियां खुद को झारखंड के गुमला का रहने वाला बताती हैं।
किशोरियों के मुताबिक वह दोनों बहनें हैं और उनकी मां उनसे छोटे दो बच्चों को साथ लेकर चली गई, लेकिन उन्हें अकेला छोड़ दिया। इसके आगे किशोरियां कुछ बताने को तैयार नहीं हुईं। पूरा दिन निकल जाने के बाद एक किशोरी के सब्र का बांध टूट गया। उसने रेलवे चाइल्ड लाइन के सदस्यों को बताया कि जो युवक स्टेशन पर उन्हें छोड़ने आया था वो उनका नया पापा है। यह सुनने के बाद रेलवे चाइल्ड लाइन के सदस्यों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
रेलवे चाइल्ड लाइन ने उस युवक से संपर्क किया तो पता चला कि किशोरियों की मां पहले ही दो शादियां कर चुकी है। तीसरी बार मीरगंज क्षेत्र के युवक से फेसबुक पर प्यार परवान चढ़ा तो बच्चों के साथ बरेली आ गई। दो दिन तक किशोरियों को अपने साथ रखा लेकिन बाद में प्रेमी के जरिए झूठी कहानी गढ़ जंक्शन पर भिजवा दिया। किशोरियां फिलहाल अनाथालय में हैं और मां के पास नहीं बल्कि अपने पिता के पास वापस जाना चाहती हैं।
रेलवे चाइल्ड लाइन दोनों किशोरियों को उनके पिता तक पहुंचाने की प्रक्रिया में लगी हुई है। बरेली जंक्शन रेलवे चाइल्ड लाइन प्रभारी खुशबू जहां ने बताया कि दोनों किशोरियों को जल्द ही उनके पिता के पास भेजा जाएगा। इसके अलावा स्टेशन पर आने वाले नाबालिगों की मदद को लेकर रेलवे चाइल्ड लाइन बेहद संवेदनशील है। ऐसे बच्चों की तत्काल मदद और काउंसलिंग की जाती है।
तीन दिन के प्यार में घर से भागकर पहुंचे जंक्शन
जुलाई माह में गोंडा की रहने वाली 14 वर्षीय एक किशोरी घर से नाराज होकर स्टेशन पहुंच गई। यहां उसकी मुलाकात एक 17 वर्षीय युवक से हुई। पहली नजर में प्यार हो गया। किशोरी वापस घर चली गई, लेकिन महज तीन दिन पहले जिस युवक से प्रेम हुआ उसके साथ घर से भागने का प्लान बना दिया। दोनों गोंडा से भागकर ट्रेन के जरिए बरेली आ गए। पुलिस के जरिए सूचना रेलवे चाइल्डलाइन को लगी तो दोनों को रेस्क्यू कर उनकी काउंसलिंग की गई और परिवार वालों के पास वापस भेजा गया।
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