संभल के निजी डाक्टर क्षयरोगियों के नोटिफिकेशन में अव्वल, अब मुरादाबाद के चिकित्सकों को गंभीरता दिखाने की जरूरत

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मुरादाबाद,अमृत विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षयरोग (ट्यूबरक्लोसिस) मुक्त भारत बनाने की मुहिम में निजी डाक्टरों को और संजीदगी दिखानी होगी। सरकारी डाक्टर टीबी मरीजों के इलाज के साथ उन्हें शत-प्रतिशत नोटिफाई करने में जुटे हैं। वहीं बहुत से निजी डाक्टर अभी भी नोटिफिकेशन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। मुरादाबाद मंडल के संभल जिले …

मुरादाबाद,अमृत विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षयरोग (ट्यूबरक्लोसिस) मुक्त भारत बनाने की मुहिम में निजी डाक्टरों को और संजीदगी दिखानी होगी। सरकारी डाक्टर टीबी मरीजों के इलाज के साथ उन्हें शत-प्रतिशत नोटिफाई करने में जुटे हैं। वहीं बहुत से निजी डाक्टर अभी भी नोटिफिकेशन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। मुरादाबाद मंडल के संभल जिले के प्राइवेट डाक्टरों ने इस मामले में नजीर पेश की है। यहां सरकारी डाक्टरों से ज्यादा प्राइवेट डाक्टरों ने टीबी मरीज नोटिफाई किए हैं। मंडल के बाकी जिलों के प्राइवेट डाक्टरों को भी ऐसे ही आगे कदम बढ़ाना होगा।

सेंट्रल टीबी डिविजन की वेबसाइट से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों के निजी डाक्टरों ने टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन में अच्छी पहल की है। वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार इस साल एक जनवरी से 29 अक्टूबर तक मुरादाबाद मंडल के संभल जिले में 3841 मरीज नोटिफाई हुए हैं जिसमें से 2186 मरीज प्राइवेट डाक्टरों की ओर से भेजे गए हैं। मथुरा में सरकारी क्षेत्र में 3290 तो प्राइवेट में 6952 टीबी मरीज अब तक पोर्टल पर नोटिफाई हुए हैं। ललितपुर में भी सरकारी और प्राइवेट डाक्टर टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन में तकरीबन बराबर हैं। इन छोटे जिलों की तुलना में मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर जैसे जिलों के प्राइवेट डाक्टरों को नोटिफिकेशन में बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। मुरादाबाद में इस साल सरकारी में 5666 तो प्राइवेट में 3481, बिजनौर में सरकारी में 5170 तो प्राइवेट में 2537, रामपुर में सरकारी में 4839 तो प्राइवेट में 1390, अमरोहा में सरकारी में 2083 तो प्राइवेट में 600 टीबी मरीजों का ही नोटिफिकेशन हुआ है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एनके कुरचैया का कहना है कि प्राइवेट डाक्टर को प्रति टीबी मरीज के नोटिफिकेशन पर 500 रुपए और सफलतापूर्वक इलाज पूरा होने पर 500 रुपए दिए जाते हैं। लिहाजा प्राइवेट डाक्टर अपने मरीज का नोटिफिकेशन कराकर सरकार के संकल्प में मददगार बनें और इंसेंटिव भी पाएं। कई डाक्टर अच्छा इंसेंटिव ले भी रहे हैं।

उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे जहां एक ओर मरीजों की शीघ्र पहचान हो सकेगी वहीँ जल्दी से जल्दी उनका उपचार शुरू कर बीमारी से मुक्ति दिलाई जा सकेगी। देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने को लेकर इस समय हर कोई मिशन मोड में है। इसी के तहत हर टीबी मरीज को पोर्टल पर नोटिफाई करने पर भी पूरा जोर है।

जनपदवार नोटिफिकेशन का हाल

जिला              सरकारी         प्राइवेट
संभल               1655             2186
मुरादाबाद         5666             3481
बिजनौर            5170             2537
रामपुर             4839             1390
अमरोहा            2083              600

दो साल तक की हो सकती है सजा
केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके मुताबिक, सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भी टीबी के मरीजों का पूरा ब्योरा सरकार को देना होगा। डीटीओ डा. कुरचैया के मुताबिक, कोई डॉक्टर मरीजों की रिपोर्ट छुपाता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 269/270 के तहत एफआईआर दर्ज करवाने का नियम है। इसमें छह माह से दो साल तक की सजा का प्रावधान है।

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