जमीन के नाम पर ठगी : शिप्रा स्टेट लिमिटेड पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

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अमृत विचार, लखनऊ। लखनऊ में शिप्रा स्टेट लिमिटेड के निदेशक मोहित सिंह के खिलाफ अलग-अलग पांच लोगों ने प्लाट दिलाने के नाम पर कुल 54 लाख की ठगी करने का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज कराया है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। गोमतीनगर …

अमृत विचार, लखनऊ। लखनऊ में शिप्रा स्टेट लिमिटेड के निदेशक मोहित सिंह के खिलाफ अलग-अलग पांच लोगों ने प्लाट दिलाने के नाम पर कुल 54 लाख की ठगी करने का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज कराया है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

गोमतीनगर विस्तार स्थित खरगापुर निवासी धनंजय सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गाजियाबाद के इन्दिरापुरम निवासी शिप्रा स्टेट लिमिटेड के निदेशक मोहित सिंह से उनकी वर्ष 2012 में मुलाकात हुई थी। मोहित ने गोमतीनगर विस्तार इलाके में इन्टीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत एलडीए से इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने का लाइसेंस होने की बात कही।

उनकी बातों में आकर टाउनशिप में एक प्लॉट के लिए 8.50 लाख रुपये जमा कर दिए। उन्होंने दो साल में रजिस्ट्री करने का दावा किया था। दस साल बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट न शुरू होने पर पैसे मांगे तो टालमटोल करने लगे। विरोध पर जान से मारने की धमकी दी। ठीक इसी तरह इंदिरानगर निवासी राहुल सोनी खुर्शेदबाग निवासी रज्जो देवी ने भी प्लॉट के नाम पर कंपनी के डायरेक्टर मोहित पर 8.50 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है।

जबकि, महानगर सेक्टर-सी निवासी विनोद अग्रवाल के मुताबिक गोमतीनगर विस्तार इलाके में टाउनशिप बनाने का दावा करने वाली शिप्रा स्टेट लिमिटेड के निदेशक मोहित सिंह ने प्लॉट के नाम पर 17 लाख रुपये लिए थे। उन्होंने दावा किया था कि दो वर्ष के भीतर प्लॉट न दे पाने पर 17 लाख की जगह 27 लाख रुपये लौटाएंगे। दस वर्ष बीतने के बाद भी कंपनी ने न तो प्लॉट दिया न ही पैसे लौटाए।

वहीं, गोमतीनगर एल्डिकोग्रीन निवासी महेश गुरनानी के मुताबिक वर्ष 2013 में शिप्रा स्टेट लिमिटेड के निदेशक ने प्लॉट दिलाने के नाम पर 11.74 लाख रुपये लिए थे। वर्ष 2017 में रजिस्ट्री करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन रजिस्ट्री तो दूर अभी तक प्रोजेक्ट तक नहीं शुरू कर पाए। गोमतीनगर थाना प्रभारी दिनेश चन्द्र मिश्रा ने बताया कि कंपनी पर पहले भी इस तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं। पीड़ितों की तहरीर पर साक्ष्यों के आधार पर जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है।

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