पीएमओ में दर्ज हुई अयोध्या नजूल जमीन घोटाले की शिकायत
अयोध्या। अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद से यहां शुरू हुई जमीनों की लूट-खसोट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि यहां 1500 बीघा नजूल की भूमि पर कालेधन की खेती लगातार जारी है। जमीन घोटाले को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों व अफसरों का नाम भी उछला, लेकिन नतीजा …
अयोध्या। अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद से यहां शुरू हुई जमीनों की लूट-खसोट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि यहां 1500 बीघा नजूल की भूमि पर कालेधन की खेती लगातार जारी है। जमीन घोटाले को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों व अफसरों का नाम भी उछला, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला, लेकिन अब मामले का पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने संज्ञान लिया है।
भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पीएमओ ने उसे रजिस्टर्ड कर लिया है। अब पीएमओ से सिर्फ जांच के आदेशों के मिलने का ही इंतजार है। अयोध्या में जमीन खरीद-फरोख्त का अवैध कारोबार बड़े ही व्यापक पैमाने पर हो रहा है। यहां कोई भी ऐसा ताल-तलैया नहीं बचा जिस पर बड़ी-बड़ी कॉलोनियां न डवलप हो गई हों।
माझा, बरहटा, जमथरा, सप्तसागर, उसरू में इसकी बानगियां दिख जाएंगी। यहां नजूल की भूमि पर बड़ी-बड़ी कॉलोनियां डवलप हो गईं। विकास प्राधिकरण, नजूल और भू-माफिया का गठजोड़ इतना हावी रहा कि बिना ले आउट के बड़ी-बड़ी कॉलोनियां काट दी गईं। अधिकारी मुट्ठी गर्म करते रहे और भू-माफिया नोटों की गड्डियां बटोरने में जुटे रहे।
मामले की शिकायत सांसद लल्लू सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ से कर एसआईटी जांच की मांग की थी। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता के आवाज बुलंद करते ही विपक्ष में भी हंगामा मच गया था और जोर-शोर से मामले को उठाया था। सभी ने मिलकर राजस्व, विकास प्राधिकरण व नजूल विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
इधर, मामले में कार्रवाई न होता देख भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने पीएमओ को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग कर दी। रजनीश ने बताया कि अयोध्या में नजूल की भूमि पर बहुत ही बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है। अफीम कोठी से राजघाट तक व बूथ नंबर 4 से नदी के किनारे तक के इलाके में लगभग 1500 बीघा जमीन में बड़ी बंदरबांट हुई है।
शजरा निकलवाने के बाद भी नतीजा सिफर
अयोध्या में आज भी बहुत सी भूमि नजूल की है, जिन पर कब्जा करने के लिए भू-माफिया नजरें गड़ाए बैठे हैं। इससे पहले भी नजूल की भूमि से हेराफेरी का मामला सामने आया था। उस दौरान भी कई बड़े नेताओं और अफसरों की गर्दन फंसती नजर आ रही थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसके बाद भूमि का शजरा भी निकलवाया था, लेकिन आज तक उस मामले में कुछ भी नहीं हुआ।
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