अनिश्चितता की भावना
कोविड-19 का प्रकोप वैश्विक है और सभी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। महामारी की वजह से विश्व न केवल एक स्वास्थ्य-आपातकाल से जूझ रहा है, बल्कि मानव समाज में अनिश्चितता की भावना और मनोसामाजिक तनाव भी पैदा कर दिया है। इसका सबसे गहरा असर बच्चों और किशोरों में हुआ है और वे तनाव, चिंता, भय …
कोविड-19 का प्रकोप वैश्विक है और सभी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। महामारी की वजह से विश्व न केवल एक स्वास्थ्य-आपातकाल से जूझ रहा है, बल्कि मानव समाज में अनिश्चितता की भावना और मनोसामाजिक तनाव भी पैदा कर दिया है। इसका सबसे गहरा असर बच्चों और किशोरों में हुआ है और वे तनाव, चिंता, भय के साथ-साथ भावनात्मक और व्यावहारिक बदलाव से भी गुजर रहे हैं।
सभी स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन शुरू हो गया है, जिससे बच्चे अब मोबाइल और लैपटॉप पर अपना समय ज्यादा बिता रहे हैं। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। बच्चों के रूटीन में भी काफी बदलाव हुआ है। इस वजह से बच्चे अब माता-पिता के साथ अपना समय नहीं बिता रहे हैं। माता-पिता के रोकने पर बच्चों में चिड़चिड़ापन देखने को मिल रहा है।अध्यापकों और अभिभावकों में भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है, जिसकी वजह से वो बच्चों की मदद नहीं कर पा रहे हैं।
इसे लेकर केंद्रीय मानव संसाधन (एमएचआरडी) विकास मंत्रालय की पहल सराहनीय है। मंत्रालय ने छात्रों को तनावमुक्त रखने के लिए ऑनलाइन वेब पेज ‘मनोदर्पण’ और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराया है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर मंत्रालय ने एक टास्क फोर्स भी गठित की है। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बच्चों की डिजिटल पढ़ाई के शारीरिक और मानसिक प्रभावों को देखते हुए ‘प्रज्ञाता’ नाम से डिजिटल शिक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, प्री प्राइमरी छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोरोना काल में बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। बच्चों की गतिविधियां और पढ़ाई भी अब ऑनलाइन हो रही है। ऐसे में बच्चों को ब्लू स्क्रीन का मतलब समझाया जाना जरुरी है। बच्चा 24 घंटों में अपना कितना वक्त फोन और लैपटॉप पर बिता रहा है, इसे स्क्रीन टाइम कहते हैं। बच्चों को ये बताना होगा कि इस दौरान परिवार के साथ रिश्तों को मजबूत करें, अच्छी चीजों में अपना समय व्यतीत करें।
घर के बुजुर्गों के साथ ज्यादा वक्त बिताएं। वे अपने पुराने किस्से साझा करेंगे और कहानियां सुनाएंगे तो बच्चों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। ऑनलाइन क्लासेस को तो नहीं रोका जा सकता मगर माता-पिता को बच्चों के प्रति व्यवहार में बदलाव करना होगा। माता-पिता को यह भी सोचना होगा कि बच्चों के पीछे ज्यादा न पड़ें, वरना बच्चे फिर चिढ़ने लगेंगे। बच्चों के मन में निगेटिविटी आनी शुरू हो जाएगी। इसलिए माता-पिता को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा
