बरेली: 6500 किसानों ने आलू की पछैती बुवाई शुरू की, 120000 टन उत्पादन की उम्मीद

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बरेली, अमृत विचार। जिले में पछैती आलू की बुवाई शुरू हो गई है। पिछले साल की तरह इस बार भी करीब 7500 हेक्टेयर भूमि पर आलू की बुवाई होने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक पछैती आलू की बुवाई के मौसम अनुकूल माना जाता है। यह भी पढ़ें- …

बरेली, अमृत विचार। जिले में पछैती आलू की बुवाई शुरू हो गई है। पिछले साल की तरह इस बार भी करीब 7500 हेक्टेयर भूमि पर आलू की बुवाई होने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक पछैती आलू की बुवाई के मौसम अनुकूल माना जाता है।

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अक्टूबर में हुई बारिश से किसानों की ओर से देर से बुवाई शुरु की गई। हालांकि इस दौरान कुछ किसानों ने आलू बोना शुरू कर दिया। मौसम ने साथ दिया तो इस बार बंपर पैदावार होगी। हालांकि खाद, बीज, घूरा आदि महंगा होने से इस बार लागत अधिक आने की आशंका है, लेकिन उत्पादन अच्छा हुआ तो इसकी भरपाई भी हो जाएगी।

जिला उद्यान अधिकारी पुनीत पाठक के अनुसार आलू की फसल दो बार उगाई जाती है। पहले सितंबर में बीज बोया जाता है, जो डेढ़ से दो महीने में तैयार हो जाती है। यह पौधे अधिक मजबूत हो जाते हैं। जिससे कोहरा का असर नहीं होता। आलू की पछेती फसल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह से बुवाई की जाती हैं।

जिले में भी बड़ी मात्रा में किसान आलू की खेती करते हैं। इसमें कोहरे से नुकसान का खतरा रहता है। जिले में इस वर्ष 7500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू के उत्पादन होना है। जिले में लगभग छह हजार से अधिक किसान आलू की खेती करते है। जिससे लगभग 1,20,000 टन उत्पादन होता है। इस उत्पादन से किसान मंडल में ही बिक्री होती है। वहीं, 24 कोल्ड स्टोरेज मौजूद है। जिसकी भंडारण क्षमता लगभग 1,17,000 टन है।

जिले में कुफरी सूर्या, आनंद व चिपसोना प्रजातियों के आलू की होती बुवाई
जिले के किसानों की ओर से सामान्यता कुफरी सूर्या, कुफरी आनंद व कुफरी चिपसोना प्रजातियों की खेती अधिक की जाती है। बरेली में स्थानीय उत्पादन में ये प्रजातियां मौसम के अनुकूल ही बुवाई की जाती है। कुफरी सूर्या की फसल लगभग 60-75 दिनों में तैयार हो जाती है। वहीं, आनंद की फसल 90-110 दिन व चिपसोना की फसल लगभग 110-120 दिनों में तैयार हो जाती है। चिपसोना में चिपसोना-1, 2,3 टाइप के आलू भी रहते है।

बाहर से भी आलू किया जाता है आयात
जिले में लगभग 1.20 लाख टन आलू उत्पादन के बाद भी कासगंज, इटावा, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा से आलू जिले में सप्लाई भी किया जाता है। बाहर से आने वाले आलू लगभग 1.15 लाख टन के आसपास रहने की उम्मीद रहती है। साल दर साल ये आंकड़ा बदलता रहता है। हालांकि बरेली का आलू स्थानीय स्तर पर ही बिकता है। कुछ किसानों द्वारा बीज में मुनाफा कमाया जाता है।

कीट व बीमारियों से बचाने को बढ़ाई जागरूकता
आलू की फसल में बहुत सी बीमारियां व कीट भी नुकसान पहुंचाते है। जिसमें पिछेता झुलसा, अगेता झुलसा, आलू की पत्ती मुड़ने वाला रोग व दीमक महत्वपूर्ण कारक है। इससे बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विशेषज्ञों व उद्यान विभाग के अधिकारियों की ओर से समय-समय पर किसानों को जागरूक किया जाता है।

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