बाराबंकी : पसमांदा मुसलमानों की बात नहीं करते मौलाना मदनी : वसीम

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अमृत विचार बाराबंकी। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने मंगलवार को यहां जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी पर सीधा हमला बोला। कहा कि मौलाना मदनी ने देश के 85 फीसदी अति पिछड़े दलित पसमांदा मुसलमान के लिए कभी कोई काम नहीं किया न ही किसी सरकार को …

अमृत विचार बाराबंकी। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने मंगलवार को यहां जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी पर सीधा हमला बोला। कहा कि मौलाना मदनी ने देश के 85 फीसदी अति पिछड़े दलित पसमांदा मुसलमान के लिए कभी कोई काम नहीं किया न ही किसी सरकार को करने दिया। कोई सरकार पसमांदा मुसलमानो की भलाई के लिए कुछ काम कर रही हैं तो उसका विरोध ज़रूर कर रहे हैं।

वसीम ने आरोप लगाया कि मौलाना मदनी सिर्फ़ अपने पंद्रह फ़ीसदी आबादी वाले अशराफ मुसलमानो तक सीमित हैं और पसमांदा मुसलमानो का इस्तेमाल सिर्फ़ भीड़ के लिए करते हैं। मुज़फ़्फ़रनगर में दंगा कराने वाली पार्टी से क्या डील मदनी साहब ने जो २०२२ के चुनाव में उनके लिए जी जान लगा दिया ।पसमांदा मुसलमानो को गुमराह कर और भाजपा का डर दिखा कर उसी पार्टी में वोट कराया इस तरह से इस्तेमाल अपनी हुई डील को कामयाब बनाया पसमांदा मुस्लिम समाज की फिक्र करके उनके हक़ हुकूक की बात करके वह देश हित समाज हित और कौम हित में दूरदर्शी मिसाल पेश कर सकते हैं लेकिन नही किया ।

वसीम राईन ने अपने बयान में कहा कि देश को आजाद कराने व आजादी के संघर्ष में जमीयत उलेमा ए हिन्द की अहम भूमिका रही है। यह बात अलग है कि उनका लगाव कांग्रेस की ओर अधिक रहा। यह वही कांग्रेस है, जिसने आर्टिकल 341 के जरिये देश की 85 फीसदी पसमांदा आबादी के बुनियादी हक़ को पैरों तले कुचलने का काम किया। उन्हें पिछड़ा, दलित, बेरोजगार, आर्थिक रूप से विपन्न रहने दिया।

यह वही कांग्रेस पार्टी है, जिसने अगड़े विदेशी मुस्लिम चेहरों का साथ कर इतने बड़े समाज को हाशिये पर रहने को मजबूर कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मौलाना अरशद मदनी बड़े मंच की अगुवाई करने के नाते देश की 85 फीसदी दलित पिछड़े मुसलमान की आवाज भी उठाएं। मुमकिन है पसमांदा समाज का भला हो, उसे नया रास्ता हासिल हो, कौम को नेतृत्व मिल सके। आखिर 85 फीसदी पसमांदा मुसलमान मूल रूप से भारतीय नागरिक हैं और अपनी जमीयत में भी पसमांदा मुस्लिमों को भी प्रदेश अध्यक्ष या महासचिव ऐसे पदों पर हिस्सेदारी देकर उन्हें भी हिस्सेदारी दें।

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