विडम्बना: 42 विद्यालय 25 टीचर, 6 हजार बच्चों की पढ़ाई राम भरोसे
नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार की उड़ रही धज्जियां
अयोध्या, अमृत विचार। बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षा, शिक्षार्थी और शिक्षक ही नहीं विद्यालय भी बदहाल हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार की धज्जियां उड़ रही हैं। आधे से अधिक विद्यालय इतने जर्जर हैं कि यहां बच्चों के साथ शिक्षक की भी जान हर समय खतरे में रहती है। आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों को अपना भवन नसीब नहीं है। इन्हें किराये के भवनों में चलाया जा रहा है।
अयोध्या महानगर में कहने को तो 42 विद्यालय हैं लेकिन शिक्षक के नाम पर केवल 25 कार्यरत हैं जिसमें 10 महिला अध्यापक हैं। इसी तरह से 25 शिक्षा मित्र हैं उनमें भी केवल 3 पुरूष बाकी सभी महिलाएं हैं, जो पढ़ाई की गाड़ी को खींच रहे हैं। एक शिक्षक पर 3 से 4 विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा है। नगर क्षेत्र में 6 हजार बच्चे नामित हैं। यह आरटीई कानून का मजाक नहीं तो और क्या है कि एक अध्यापक पर 240 बच्चों को पढ़ाने का दायित्व थोपा गया है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी कहते हैं कि आरटीई कानून 2009 के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में 30 बच्चों पर एक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बच्चों पर एक अध्यापक होना चाहिये। नगर क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति इतनी खराब है कि बताना मुश्किल है। लेकिन शासन और शिक्षा विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। विद्यालयों की स्थिति यह है कि एक-एक कमरे में पढ़ाई होती है। किराये के भवन इतने जर्जर हैं कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। जाड़ा, गर्मी हो या बारिश, हर मौसम में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत सम्पूर्ण शिक्षा प्राप्त हो पा रही है।
स्कूल में ना बच्चों के लिए कमरे हैं न ही छत
नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति कैसी है, महात्मा गांधी वार्ड में प्राथमिक विद्यालय बछड़ा इसकी एक बानगी भर हैं। यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन दिखते खंडहर और जर्जर जैसे हैं। इस प्राथमिक स्कूल में न बच्चों के लिए कमरा हैं न ही छत हैं, न ही शौचालय। एक शिक्षक है। यहां बच्चों की शिक्षा राम के भरोसे है। यहां के बच्चे अपनी जान को जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं। एक ही शिक्षक के द्वारा पढ़ाया जा रहा है सभी बच्चों को। यहां पढ़ा रहे शिक्षक ने बताया कि यह प्राथमिक विद्यालय किराये के कमरे मेन्स पर चल रहा है।
इस विद्यालय की दुर्दशा को लेकर समाजसेविका अर्चना तिवारी ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजकर महानगर स्थित प्राथमिक विद्यालय बछड़ा सरकारी या नजूल की खाली पड़ी जमीन पर भवन बनवाकर शिफ्ट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के लिए एक सुंदर प्राथमिक विद्यालय शिक्षा-दीक्षा के लिए खोला जा सकता है। जिससे इस वार्ड के बच्चों का भविष्य उज्जवल बन सके।
बोले जिम्मेदार
नगर क्षेत्र में 42 विद्यालय हैं। यहां 25 टीचर और 25 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। 7 विद्यालय किराये के भवन में चल रहे हैं। जर्जर अवस्था वाले 7 विद्यालय परिषदीय विद्यालय में शिफ्ट हो चुके हैं। नगर क्षेत्र में छात्र संख्या 6 हजार है। यह बात सही है कि कुछ विद्यालयों में शौचालय नही हैं। ऐसा कोई विद्यालय नहीं है जो जर्जर भवनों में चल रहा हो। किराये वाले भवनों को परिषदीय विद्यालयों के भवनों में शिफ्ट करने के लिए कमेटी तय कर चुकी हैं, स्थल चयनित हैं। जो स्कूल परिषदीय हैं नजदीक में है उसी में शिफ्ट कर दिया जाएगा। एक डेढ़ माह में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
शैलजा मिश्रा, नगर शिक्षा अधिकारी
