परियोजना की जरूरत
कोरोना महामारी के चलते देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार की जरुरत है। वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने अपने महत्वाकांक्षी और विवादित- सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट- के लिए दिल्ली मास्टर प्लान में संशोधन को मंजूरी देते हुए देशव्यापी लाकडाउन के दौरान ही गत 20 मार्च को नोटिफिकेशन …
कोरोना महामारी के चलते देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार की जरुरत है। वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने अपने महत्वाकांक्षी और विवादित- सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट- के लिए दिल्ली मास्टर प्लान में संशोधन को मंजूरी देते हुए देशव्यापी लाकडाउन के दौरान ही गत 20 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट का बजट 20,000 करोड़ रुपये का है। प्रोजेक्ट के तहत सेंट्रल विस्टा में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की इमारतें, महत्वपूर्ण मंत्रालय और इंडिया गेट जैसी प्रतिष्ठित इमारतें हैं। केंद्र सरकार एक नया संसद भवन, एक नया आवासीय परिसर बनाकर उसका पुनर्विकास करने का प्रस्ताव कर रही है जिसमें प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति कार्यालय के अलावा कई नये कार्यालय भवन होंगे।
वहीं कांग्रेस इस प्रोजेक्ट के साथ प्रस्तावित मेगा 17 राज्यों की राजधानी में बनने वाले केन्द्रीय सचिवालय पर भी रोक लगाने की मांग कर रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रीय संकट के समय आलीशान भवनों के निर्माण पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करना सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है। सेंट्रल विस्टा परियोजना पर रोक संबंधी याचिका पर उच्चतम न्यायालय में गुरुवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी और इसे अगले बुधवार 29 जुलाई तक के लिए टाल दी गई।
इस बीच केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करके इस परियोजना की आवश्यकता को न्यायोचित ठहराने का प्रयास किया। सीपीडब्ल्यूडी ने कहा है कि यह परियोजना संसद भवन, मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लाई गई है। मौजूदा संसद भवन और मंत्रालय जिन इमारतों में चल रहे हैं वे पुरानी हो चुकी हैं। इस वजह से नई परियोजना की जरूरत सामने आई है। राजीव सूरी एव अन्य याचिकाकर्ताओं ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लैंड यूज बदलने के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के 20 मार्च के आदेश को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने गत 19 जून को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी पर भी सवाल खड़े किए हैं और अपनी याचिकाओं में संशोधन की अनुमति मांगी थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था। बीस हजार करोड़ की इस परियोजना के लिए 20 मार्च को केंद्र ने संसद, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक के पुनर्निर्माण के लिए 86 एकड़ जमीन का लैंड यूज बदला था।
