National Press Day आज, 56वां राष्ट्रीय प्रेस दिवस मना रहा भारत
गुलाम देश को आजाद करना हो या फिर आजाद देश की लोकतांत्रिकता को सुचारू व स्वस्थ रूप से चलाना हो उसमें प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
नई दिल्ली। पूरे विश्व में प्रेस का इतिहास बहुत शानदार रहा है। गुलाम देश को आजाद करना हो या फिर आजाद देश की लोकतांत्रिकता को सुचारू व स्वस्थ रूप से चलाना हो उसमें प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत देश तो इस बात का जीता जागता उदाहरण है। भारत में प्रेस को स्थापित करने के लिए प्रेस को भी बहुत संघर्ष करना पड़ा है।
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भारत में प्रेस
1947 के पहले यानी भारत जब गुलाम देश था। प्रेस पर बहुत अत्याचार हुआ। लेकिन, भारत में प्रेस के लिए दो चुनौतियां थीं एक तो अपने आवाज को उठाना और जन-जन तक देश की स्वतंत्रता के लिए लोगों में जज्बा भरना। ताकि देश की जनता आजादी के लिए अंग्रेजों का पूरी साहस के साथ सामना कर सके। लेकिन भारतीय प्रेस के लिए इन सबसे ज्यादा जो बड़ी चुनौती थी वो ये कि प्रेस को संचालित कैसे करें। क्योंकि ब्रिटिश शासक भारत में प्रेस को कुचल देते थे। प्रेस सेंसर का शिकार रहा। फिर भी भारतीय प्रेस ने बड़ी साहस के साथ हर परिस्थियों के साथ गोरों का सामना किया और देश की आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान दिया।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस का इतिहास
भारत में पत्रकारिता में उच्च आदर्श स्थापित करने एवं प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए एक प्रेस परिषद को तैयार किया गया था। जिसके बाद 1966 में 4 जुलाई को एक प्रेस परिषद की स्थापना की गई थी। इस स्थापित प्रेस परिषद ने 16 नवंबर से कार्यभार संभाला था। जिसके बाद से हर साल 16 नवंबर को प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस का महत्व
16 नवंबर को प्रेस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोगों में प्रेस के प्रति और प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके। राष्ट्रीय प्रेस दिवस को इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को आगाह किया जा सके कि प्रेस लोकतंत्र के मूल्यों की बहाली में बहुत ही अहम भूमिका निभाती है एवं हमारे अधिकारों का हनन होने से बचाती है। आज का दिन मुख्यतः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं इसको बनाए रखने तथा सम्मान करने की प्रतिबद्धता की बात करता है।
