अयोध्या: प्रशासन की रोक के बाद भी डूब क्षेत्र में हो रहा प्लाटिंग और निर्माण
अमृत विचार, अयोध्या। भू-माफिया के आगे यहां सब नतमस्तक हैं। जिला प्रशासन की रोक के बाद भी डूब क्षेत्र में प्लाटिंग और निर्माण फिर हो रहा है। गंभीर बात यह है कि बीते दिनों जहां - जहां अयोध्या विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई की थी अब फिर वहां भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं। नजूल की जमीनों पर कब्जे कर प्लाटिंग के बाद धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। कार्रवाई को लेकर अपनी पीठ थपथपाने वाले प्राधिकरण के जिम्मेदार अब शांत बैठे हैं।
अब इस मामले को संजय यादव नामक व्यक्ति ने उठाते हुए प्राधिकरण उपाध्यक्ष को पत्र भेजा है। इसी 18 नवम्बर भेजे पत्र में श्री यादव ने लिखा है कि डूब क्षेत्र में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग से बंधे के बीच भू-माफिया प्लाटिंग व निर्माण कर रहे हैं। खाता संख्या 52. गाटा संख्या 84, 85. 88. 87, 88, 79, 80 पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। बताया गया है कि रेतिया पुल के नीचे डूब क्षेत्र की तरफ प्लाटिंग कर निर्माण किया जा रहा है जिस पर अयोध्या विकास प्राधिकरण ने पूर्व में कार्यवाही की थी।
पुनः जो प्लाटिंग की गयी है उस पर बहुत तेजी से निर्माण किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि क्षेत्र में कई तारपुर रजौली, मुरावन टोला आदि के कई भू-माफिया ने पुनः निर्माण व प्लाटिंग शुरू कर दिया है। भू माफिया ने बहुत सी सरकारी नजूल की जमीन को गौरा पट्टी कि बताकर लोगों को बेवकूफ बनाकर उस पर कब्जा दे दिया है।
मांग की गई है कि जिस दिन 14 कोसी परिक्रमा मार्ग से बंधे के बीच सही से गौरा पट्टी व तारापुर रजाली भूमि की नाप सही से हो गयी, सब साफ-साफ नजर आ जायेगा कि भू माफिया ने कितनी नजूल सरकारी जमीन बेची है। शिकायत कर्ता ने जांच करा एंटी भू-माफिया के तहत रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग की है।
कमिश्नर के निर्देश के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने भू-माफिया से गठजोड़ के चलते अपने बचाव के लिए पत्राचार का खेला भी खेला। 3 अगस्त को उपाध्यक्ष ने जिला अधिकारी को इस संबध में एक पत्र भेजा जिसकी एक कापी कमिश्नर को भी भेजी। जिस पर क्रय विक्रय रोके जाने की बात कही गई थी।
प्राधिकरण ने खुद स्वीकारा था कि डूब क्षेत्र में परिक्रमा मार्ग व बंधे के बीच तेजी से अवैध निर्माण हो रहा है। दावा किया कुछ पर कार्रवाई भी की गई। इसी पर कमिश्नर ने भी डीएम को लिखा था कि क्रय विक्रय न रुकने से अवैध निर्माण व प्लाटिंग की समस्या बढ़ती जाएगी। क्रय विक्रय पर रोक लगाई जाए लेकिन प्रशासन की ओर से इसे अभी तक गंभीरता से नहीं लिया गया है जबकि प्राधिकरण गेंद प्रशासन के पाले में डाल अब हाथ बांध बैठा हुआ है।
