हल्द्वानी: शासन से हरी झंडी मिलते ही कई नये रूटों पर भी दौड़ेंगीं केमू की बसें
हल्द्वानी, अमृत विचार। पर्वतीय क्षेत्रों में कुमाऊं मोटर्स आनर्स यूनियन लिमिटेड (केमू) की बस सेवाएं बढ़ने की उम्मीद जगी है। इससे जहां यात्रियों को सुविधा होगी वहीं केमू की आर्थिक हालत भी सुधरेगी। केमू प्रशासन को उम्मीद है कि उत्तराखंड कैबिनेट से जल्द ही केमू के प्रस्ताव को सहमति मिल सकती है।
इससे जहां नए रूटों पर केमू की बसें दौड़ेंगीं वहीं बंद पड़े रूटों पर भी यात्री फिर से केमू की बसों में सफर कर सकेंगे। वर्षों से केमू पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रियों को काफी कम दरों पर बस सेवा सुलभ कराती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में अधिकांश मार्गों पर केमू की बस सेवाएं बंद हो गईं। इससे जहां यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा वहीं केमू की आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई।
केमू को इस संकट से उबारने और यात्रियों को आवागमन में सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2013 में केमू प्रशासन की ओर से मार्ग बढ़ाने का प्रस्ताव बना कर सरकार को भेजा गया। लेकिन इस पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई। केमू के अध्यक्ष सुरेश डसीला ने बताया कि सरकार की ओर से अब इस मामले में सकारात्मक आश्वासन मिला है।
उन्होंने बताया कि यदि प्रस्ताव पास हो जाता है तो हल्द्वानी से टनकपुर, चंपावत, घाट- पनार, धारचूला, चर्मा, गरमपानी, द्वाराहाट, गगास आदि मार्गों पर बस सेवाएं बढ़ाईं जाएंगी। साथ ही नए मार्गों पर भी केमू बसों के संचालन की अनुमति मिलेगी। केमू के पास अभी करीब 350 बसें हैं। इनमें से अधिकांश बसों को महीने में 15 दिन ही रूट पर चलने का मौका मिलता है। इससे केमू को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
विगत वर्षों में पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश गांवों तक सड़क सुविधा मुहैया हो गई है। इन मार्गों पर जीप, टैक्सी सेवा तो उपलब्ध है लेकिन किराया अधिक होने से गरीब तबके के लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी केमू के संचालन की अनुमति दी जाती है तो लोगों के आवागमन की सुविधा में इजाफा होगा।
