कानपुर: राजनीति की नई रणभेरी, कंचौसी पहुंचे पचौरी

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Edited By Amrit Vichar
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भोले के गांव जाकर फरक्का ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

अमृत विचार, कानपुर। भाजपा की राजनीति में कानपुर नगर और देहात (अकबरपुर) के सांसदों की गलबहियां लगातार चर्चा में हैं। नया मामला नगर से सांसद सत्यदेव पचौरी का भोर पहर चार बजे अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह भोले के पैतृक गांव कंचौसी पहुंचकर रेलवे के कार्यक्रम में शिरकत करना है। रेलवे ने कंचौसी स्टेशन पर फरक्का एक्सप्रेस को ठहराव दिया है। इस कार्यक्रम में सांसद को झंडी दिखानी थी। अब भोले के कार्यक्रम में पचौरी की मौजूदगी के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। 

बीते दिनों दोनों सांसदों की विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से भी ठन चुकी है। विकास कार्यों को लेकर मंडलायुक्त डा.राजशेखर के शिविर कार्यालय में बैठक बुलाने की महाना की पहल का दोनों सांसदों ने पुरजोर विरोध किया था। विरोध पत्र में दोनों सांसदों के साथ मिश्रिख के सांसद अशोक रावत के भी हस्ताक्षर थे। 

दरअसल, भाजपा चुनावी राजनीति में 75 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नेताओं के स्थान पर नए चेहरे स्थापित करना चाहती है। ऐसे में संभव है कि पचौरी को अगला चुनाव लड़ने से नेतृत्व रोक सकता है। इसके चलते ही पचौरी की नगर से प्रत्याशिता पर  सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष  महाना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकातों के भी राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं। पार्टी के कुछ नेता दबी जुबान कह रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में नगर सीट से जिताऊ प्रत्याशी की बात आने पर नेतृत्व की नजर सतीश महाना पर टिक सकती है। इसी के साथ जोड़ा जा रहा है कि पचौरी 75 साल के हो चुके हैं, ऐसे में  आयु के पैमाने पर उनकी टिकट खतरे में पड़ सकती है। 

हालांकि आरएसएस से संपर्कों के चलते पचौरी को दोबारा लड़ाने के पक्ष में भी काफी लोग खड़े दिख रहे हैं। इस कशमकश में माना जा रहा है कि आयु के चलते अगर पचौरी का टिकट कटा तो वह किसी अपने को मैदान में उतार सकते हैं। भाजपा सूत्रों की माने तो गोविंदनगर से विधायक सुरेंद्र मैथानी भी नगर संसदीय सीट से टिकट के दावेदार हैं। यदि मैथानी को मौका मिलता है तो पचौरी किसी अपने के लिए गोविंदनगर से विधान सभा का टिकट मांग सकते हैं। इस सबके बीच महाना का नाम सबसे ऊपर रखने वाले भी कम नहीं हैं। महाना 1991 से लगातार विधायक हैं और प्रदेश सरकार में कबीना मंत्री रह चुके हैं। लेकिन पचौरी और भोले का एक साथ कार्यक्रमों में जाना और मीडिया के सामने बयानी तंज कसना उनका खेल बिगाड़ सकता है।  

ई-बसों को शुरू करने में दोनों सासंदों का बस में बैठना पहले ही चर्चा में है। हालांकि भोले समर्थक कहते हैं कि ये बसें भोले के  क्षेत्र में महाराजपुर, बिठूर और कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र को कवर करती हैं। ऐसे में भोले का जाना लाजिमी था। मेट्रो ट्रेन उद्घाटन में भी दोनों सांसद साथ-साथ थे। अब कंचौसी में ट्रेन के ठहराव को लेकर तड़के चार बजे आयोजित कार्यक्रम में सांसद पचौरी के जाने को इसी कड़ी में जोड़ा जा रहा है।

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