ब्राजील की चुनाव एजेंसी ने बोलसोनारो की अपील खारिज की, मतों को रद्द किए जाने की थी मांग

ब्राजील की चुनाव एजेंसी ने बोलसोनारो की अपील खारिज की, मतों को रद्द किए जाने की थी मांग

रियो डी जिनेरियो। ब्राजील के निर्वाचन प्राधिकरण के प्रमुख ने हाल में हुए आम चुनाव में अधिकतर ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन’ (ईवीएम) के जरिए डाले गए मतों को रद्द घोषित किए जाने के देश के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो और उनके राजनीतिक दल के अनुरोध को बुधवार को खारिज कर दिया। ब्राजील के निवर्तमान राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो ने चुनाव में मिली हार के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद मंगलवार को सॉफ्टवेयर संबंधी किसी दिक्कत (बग) का हवाला देते हुए चुनाव परिणाम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने निर्वाचन प्राधिकारियों से देश की अधिकतर ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन’ (ईवीएम) के जरिये डाले गए मतों को रद्द करने की मांग की थी।

 बहरहाल, विशेषज्ञों का कहना है कि इस ‘बग’ से परिणाम की विश्वसनीयता पर कोई असर नहीं पड़ा। बोलसोनारो और उनकी ‘लिबरल पार्टी’ की ओर से 33 पन्नों की अपील दायर करने वाले वकील मार्सेलो डी बेसा ने कहा था कि मतों को रद्द किए जाने के बाद बोलसोनारो के पास 51 प्रतिशत वैध मत रहेंगे और वह चुनाव में पुन: जीत जाएंगे। देश की ‘सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट’ के न्यायाधीश एलेक्जेंडर डी मोरेस ने लिबरल पार्टी और बोलसोनारो की अपील को खारिज कर दिया।

 उन्होंने पार्टी पर यह मुकदमा दायर करने के लिए 43 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया। निर्वाचन प्राधिकारी पूर्व राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा को पहले ही विजयी घोषित कर चुके हैं और बोलसोनारो के कई सहयोगियों ने भी नतीजों को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, बोलसोनारो के हार नहीं मानने के कारण कई शहरों में लोगों ने प्रदर्शन किए और परिणाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया। लिबरल पार्टी के नेता वालडेमार कोस्टा और डी बेसा ने कहा कि 2020 से पहले की करीब 2,80,000 मशीनों के आंतरिक ‘लॉग’ में व्यक्तिगत पहचान संख्या नहीं थी।

 उन्होंने कहा कि इस ‘बग’ का पहले पता नहीं चला था। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि इससे परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ा है। साओ पाउलो विश्वविद्यालय के पॉलिटेक्निक स्कूल में कंप्यूटर इंजीनियरिंग और डिजिटल सिस्टम के प्रोफेसर विल्सन रग्गिएरो ने बताया कि प्रत्येक वोटिंग मशीन को अब भी उसके शहर और मतदान जिले जैसे अन्य माध्यमों से आसानी से पहचाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणाम की विश्वसनीयता पर कोई सवाल खड़ा नहीं होता।

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