महत्वपूर्ण सवाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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देश में कहीं न कहीं चुनाव की प्रक्रिया चलती रहती है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो देश में चुनावों को कराती है। लोकतंत्र की जीवंतता तो इसमें नजर आती है, लेकिन ये सवाल भी अब उठने लगा है कि क्या चुनाव वाकई इतने निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो रहे हैं, जिसका दावा किया जाता है। पिछले कुछ समय से चुनाव प्रक्रिया जिस तरह संचालित होती रही है, उसे लेकर उठने वाली आशंकाएं इस संस्था की मजबूती व विश्वसनीयता को और बेहतर करने की जरूरत दर्शाती हैं।

संदेश निकलता है कि चुनावों को और ज्यादा विश्वसनीयता का आधार देने की जरूरत है। इन्हीं सवालों के बीच उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति की प्रक्रिया में जल्दबाजी बरते जाने की बात कहकर कई महत्वपूर्ण पर सवाल उठाए। केंद्र सरकार ने गुरुवार को चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 324 (2) का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें नियुक्ति की कोई प्रक्रिया नहीं बताई गई है। किसी प्रक्रिया का उल्लेख न होने पर संविधान की चुप्पी का फायदा उठाया जा रहा है। कोई कानून नहीं है इसलिए केंद्र भी कानूनन सही है।

कानून के अभाव में कुछ किया भी नहीं जा सकता है लेकिन पिछले सात दशकों में कानून बनाने के लिए कुछ नहीं किया गया। अदालत ने केंद्र से पूछा कि निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए सात  दशक में कानून क्यों नहीं बना। शीर्ष अदालत ने  2004 के बाद मुख्य चुनाव आयुक्तों के छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल किए।

हालांकि अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि जिस मौजूदा प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करते हैं, उसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता और अदालत उसे खारिज नहीं कर सकती। वास्तव में संविधान पीठ ने एक जरूरी मसले को उठाया है और सुदृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने की जो आकांक्षा जाहिर की है, वह दरअसल लोकतंत्र में यकीन रखने वालों के मन की बात है।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद अब उम्मीद की जानी चाहिए कि यह मामला परिणति तक पहुंचेगा। भारत जीवंत और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव सुधारों के जरिये इसे और मजबूत किया जाना चाहिए।