साइबर सुरक्षा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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भारत में साइबर हमलों का दायरा बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के सर्वर पर साइबर हमले का है। इसके बाद देश की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कहीं चीन की ओर से तो यह साइबर हमला नहीं किया गया है? सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत खुद को इन हमलों से सुरक्षित रखने में सक्षम है? जानकार कह रहे हैं कि इस घटना से साइबर हमलों का एक नया मोर्चा खुल गया है और भारत को अब इस मोर्चे पर भी बेहद सजग रहने की जरूरत है।

अक्टूबर 2020 में मुंबई में बड़े पैमाने पर बिजली की आपूर्ति में जो खराबी आई थी उसके पीछे चीन से हुआ एक साइबर हमला था। चीनी हैकर्स ने कुछ महीने पहले लद्दाख के पास पावर ग्रिड को निशाना बनाने की कोशिश की थी। उस समय केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा था कि चीनी हैकर्स ने लद्दाख के पास इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स को निशाना बनाने की दो कोशिशें की थीं। इन हमलों से पहले दो बंदरगाहों मुंबई पोर्ट और तूतीकोरिन पोर्ट तथा दिल्ली, कर्नाटक एवं तेलंगाना के क्षेत्रीय लोड डिस्पैच केंद्रों पर ऐसे हमले किए गए। चीन की खुद की एक विशाल साइबर आर्मी है, जिसमें 3 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं। ये हैकर्स चीन के चेंगदू इलाके में जमा हैं।

इस बदलते वक्त में जब दो देशों की सेनाएं आमने-सामने आकर नहीं लड़ती हैं तो ऐसे में दोनों देशों की साइबर सेनाएं एक-दूसरे पर अटैक करती हैं और चीन इस मामले में सबसे आगे है। हैकर आम तौर पर साइबर हमलों के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा हमले ट्रोजन वायरस के जरिए किए जाते हैं। इसके अलावा स्टैंड एलोन और इन्फेक्टर्स यानी रिमोट सर्वर के जरिए किसी कंप्यूटर सिस्टम में वायरस डाल कर उसके आंकड़े चुरा लिए जाते हैं। साइबर विशेषज्ञों ने कहा है कि हैकर अब रैंसमवेयर का भी सहारा ले रहे हैं। इसके जरिए हर 14 मिनट में एक कंप्यूटर को निशाना बनाया जाता है। भारत के पास अभी व्यापक, आधुनिक और उन्नत साइबर युद्ध की रणनीति नहीं है। भारत अभी भी राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति 2020 को हरी झंडी देने की प्रक्रिया के दौर में है। भारत के पास इन मामलों में दिशा निर्देश देने के लिए 2013 की  राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति ही है। भारत को ऐसी रणनीति लागू करने की ज़रूरत है, जो दो तरह के विचारों पर आधारित हो आत्मरक्षा और आक्रमण के लिए साइबर रणनीति। भारत को चाहिए कि वो इन दोनों विचारों की मदद से अपनी साइबर रणनीति तैयार करे। साइबर क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत है, इसके लिए भारत को आक्रामक क्षमताओं का विस्तार करना होगा।