बरेली: चाइनीज एप ‘स्नैक वीडियो’ ट्रेंडिंग में, खतरा बढ़ा
रजनेश सक्सेना, बरेली। टिकटॉक के बाद अब एक और चाइनीज एप बेहद तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसकी सभी विशेषताएं एक दम टिकटॉक जैसी हैं। लेकिन तारीफ करने वाले लोगों को यह नहीं पता कि वह एक चाइनीज एप की तारीफ कर रहे हैं। यह एप और ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसने अपनी शर्तों …
रजनेश सक्सेना, बरेली। टिकटॉक के बाद अब एक और चाइनीज एप बेहद तेजी से पॉपुलर हो रहा है। इसकी सभी विशेषताएं एक दम टिकटॉक जैसी हैं। लेकिन तारीफ करने वाले लोगों को यह नहीं पता कि वह एक चाइनीज एप की तारीफ कर रहे हैं। यह एप और ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इसने अपनी शर्तों में पहले ही आपके डाटा को इस्तेमाल करने की बात कही है।
30 जून को सरकार ने 59 चाइनीज एप्लीकेशन को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद कई इंडियन एप भी सामने आए। लोगों ने खूब डाउनलोड करना शुरू कर दिया। लेकिन इस बीच स्नैक वीडियो नाम का एक चाइनीज एप को भी लोगों ने डाउनलोड कर लिया। लेकिन हकीकत तो यह है कि उन्हें इस बारे में पता ही नहीं है कि वह एक चाइनीज एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसएस बेदी बताते है कि स्नैक वीडियो एप्लीकेशन का डोमेन चीन के बीजिंग का है। जबकि इसे बनाने वाला सिंगापुर का है। इसलिए यह एप्लीकेशन पूरी तरह से चाइनीज है। एप्लीकेशन की शर्तों में साफ तौर पर लिखा है कि यूजर्स द्वारा दी गई जानकारी (नाम, पता, प्रोफाइल फोटो, मोबाइल नंबर आदि) जरूरत पड़ने पर बाहर भेजी जा सकती है। जब इस बारे में शहर के तमाम लोगों से बात की गई, तो उनका यही कहना था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह एक चाइनीज एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक ओटीपी मतलब पूरी अनुमति
एसएस बेदी बताते हैं कि जब आपके फोन पर कोई भी कंपनी एक ओटीपी भेजती है, और जब आप उसे दर्ज करते हैं। इसका मतलब है कि आपने उसे अपने फोन में घुसने की अनुमति दे दी है। इसके बाद फिर एप्लीकेशन बनाने वाला देश या कंपनी आसानी से आपके फोन का डाटा हैक कर सकती है। प्रोफेसर बेदी का कहना है कि जब भी कोई एप्लीकेशन किसी भी प्रकार की अनुमति मांगे तो एक बार उसकी शर्तों को पहले जरुर पढ़ लें।
