Jhakarkati Bus Adda से चलने वाली बसों की बांदा-रायबरेली की सड़कों में पहुंचते ही थमती रफ्तार, जानें इसकी वजह

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर की बसों की हालत हो रही जर्जर।

कानपुर के झकरकट्टी बस अड्डे से चलने वाली बसें बांदा-रायबरेली की सड़कों में पहुचंते ही रफ्तार थम जाती है। जिससे प्रतिदिन डेढ़ लाख का बसों में बनने का खर्च आ रहा है।

कानपुर, अमृत विचार। रायबरेली और बांदा की खस्ताहाल सड़कें परिवहन विभाग की कमर तोड़ रही हैं। इस रूट पर 90 से 100 किमी तक की खराब सड़कों की वजह से इस रूट की करीब 60 बसों पर प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च बढ़ रहा है। यह खर्च डीजल के अतिरिक्त व्यय और मेंटीनेंस की वजह से हो रहा है।

बांदा और रायबरेली जाने वाली बसों में ज्यादातर बसों का संचालन झकरकटी बस अड्डे से होता है। बांदा जाने वाली बसें बिंदकी और ललौरी होते हुए जाती हैं। यहां करीब 100 किमी तक की सड़कों का बुरा हाल है। बड़े गड्ढे और खस्ताहाल सड़कों पर बसों की रफ्तार भी थम जाती है।

इस रूट पर सवारियां भी अधिक होती हैं। ऐसे में बसों में यात्रियों का लोड भी बढ़ जाता है। ऐसे में जब भी गड्ढे में बस जाती है, यात्रियों से लेकर आर्थिक रूप से भी परिवहन विभाग की कमर तोड़ रही हैं। यही हाल रायबरेली जाने वाली बसों का है। इस रूट पर भी लालगंज में करीब 90 किमी तक की सड़कें बहुत खराब हैं। इस रूट पर जाने वाली बसों को गड्ढों और खस्ताहाल सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है।

परिवहन विभाग के चुन्नीगंज बस अड्डे के एआरएम राजेश कुमार बताते हैं कि इस रूट पर जाने वाली हर बस में प्रतिदिन डीजल का खर्च बढ़ जाता है। खराब सड़क की वजह से ऐसा होता है। पांच लीटर तक डीजल, के अलावा कमानी टूटने और अन्य खराबी की समस्या की वजह से प्रतिदिन तीन हजार तक खर्च बढ़ जाता है।

एआरएम केके आर्या ने बताया कि करीब 60 बसें इन दोनों रूट पर जाती हैं। खराब सड़कों की वजह से लगभग सभी बसों पर प्रतिदिन वर्कशॉप में काम कराना पड़ता है।

दो गुना हो जाता है सफर

जो सफर तीन घंटे का होना चाहिए, वह छह से सात घंटे तक पहुंच जाता है। गंतव्य तक यात्रियों को दोंचियों के साथ पहुंचना पड़ता है। इसमें यदि कोई बीमार सवार है तो उसकी हालत और बिगड़ जाती है। कोई बुजुर्ग है तो उसको शारीरिक तकलीफ ज्यादा होती है। एआएम राजेश कुमार बताते हैं कि बस 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पूरा सफत कवर करती है। लेकिन रायबरेली और बांदा पहुंचने के लिए यह औसत गड़बड़ा जाता है। यहां 100 से 120 किमी का सफर तय करने में एक बस को छह से सात घंटे लग रहे हैं। एक बस को दो गुना ज्यादा समय लग रहा है गंतव्य तक पहुंचने में। सवारियों को भी इससे परेशानी है।

 बांदा और रायबरेली रूट पर सड़कें काफी खस्ताहाल हैं। गड्ढे हैं और काफी खराब हैं। इस वजह से बसों को काफी नुकसान हो रहा है। प्रतिदिन इस रूट की बसों को वर्कशॉप में जांचना पड़ता है।- लव कुमार सिंह, आरएम

 

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