राम के चरित्र हमारे मानस के अंतः करण में प्रसारित होने चाहिए : उमा शंकर पांडेय
मड़ियाहूं जौनपुर। रामचरितमानस की एक एकचौपाई मंत्र है। इसका मानव को अपने जीवन में उपयोग करना चाहिए। राम के चरित्र हमारे मानस के अंतः करण में प्रसारित होने चाहिए ।उक्त बातें प्रख्यात विद्वान उमाशंकर पांडे शास्त्री जीने अखंड रामचरितमानस पाठ के समापन केबाद ग्राम पडराव में महेंद्र पांडे के आवास पर श्रद्धालु जनों को संबोधित करते हुए कहा। इन्होंने का की राम के चरित्र को भगवान शिव ने अपने मानस में संजोकर रखा था। समय आने पर उसके अधिकारी के समक्ष उजागर किया। वैसे तो रामचरितमानस की बहुत सी टिकाए हुई हैं महर्षि वाल्मीकि ने और अन्य लोगों ने भी तमिल भाषा में भी इसकी रचना किया है किंतु गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस सभी लोगों को समझने के योग्य है ।मानस का उत्तरकांड वही है जो भगवान श्री कृष्ण ने गीता में उपदेश किया है। मंत्र महा मणि विषय व्याल के मेटत कठिन कुअक भाल के इस मौके पर पूर्व चंद्र प्रकाश दुबे एडवोकेट कन्हैया लाल पांडे राधा कृष्ण शर्मा एडवोकेट अभिषेक आशीष शिवम विवेक पांडे जेडी सिंह सुशील कुमार उपाध्याय अमित कुमार तिवारी तथा सरगम दुबे सहित अनेक लोग थे अंत में आयोजक महेंद्र पांडे ने समस्त लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
