खतरा टला नहीं है
‘कारगिल विजय दिवस’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी के मंत्र की याद दिलाई। गांधी का मंत्र था, कि, यदि किसी को कभी कोई दुविधा हो कि, उसे क्या करना, क्या न करना, तो, उसे भारत के सबसे गरीब और असहाय व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए | उसे ये सोचना चाहिए कि जो …
‘कारगिल विजय दिवस’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी के मंत्र की याद दिलाई। गांधी का मंत्र था, कि, यदि किसी को कभी कोई दुविधा हो कि, उसे क्या करना, क्या न करना, तो, उसे भारत के सबसे गरीब और असहाय व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए | उसे ये सोचना चाहिए कि जो वो करने जा रहा है, उससे, उस व्यक्ति की भलाई होगी या नहीं होगी | वास्तव में इस मंत्र को समझना समय की मांग है। जब हम कुछ नया करने की सोचते हैं, रचनात्मक सोचते हैं, तो, ऐसे काम भी संभव हो जाते हैं, जिनकी आम-तौर पर, कोई कल्पना नहीं कर सकता।
सही बात है कि युद्ध, केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते हैं, देश में भी कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा जाता है। पिछले कुछ महीनों से पूरे देश ने एकजुट होकर जिस तरह कोरोना से मुकाबला किया है, उसने, अनेक आशंकाओं को गलत साबित कर दिया है | हमारे देश में कोरोना से मृत्यु-दर भी दुनिया के ज्यादातर देशों से काफ़ी कम है। कोरोना का खतरा टला नहीं है | कई स्थानों पर यह तेजी से फैल रहा है। इसीलिए, हमें पूरी सावधानी बरतनी है | सकारात्मक सोच से हमेशा आपदा को अवसर में, विपत्ति को विकास में बदलने में मदद मिलती है | अभी महामारी के समय में भी देख रहे हैं, कि, कैसे हमारे के युवाओं-महिलाओं ने, अपनी प्रतिभा और दक्षता के दम पर कुछ नये प्रयोग शुरू किए हैं |
प्रधानमंत्री का कहना सही है कि एक तरफ हमें कोरोना के खिलाफ लड़ाई को पूरी सजगता और सतर्कता के साथ लड़ना है, तो दूसरी ओर, कठोर मेहनत से, व्यवसाय, नौकरी, पढाई, जो भी, कर्तव्य हम निभाते हैं, उसमें गति लानी है। तसल्ली की बात यह है कि वैश्विक सर्वेक्षण की कई रिपोर्ट बता रही हैं कोरोना की चुनौतियों के बीच भी दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर जल्द आएगी और खोए हुए रोजगार अवसर वापस लौटने की संभावनाएं होंगी।
आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर में वृद्धि होगी व भारत की कौशल प्रशिक्षित नई पीढ़ी के लिए देश और दुनिया में रोजगार के मौके बढ़ने की संभावनाएं होगी। रोजगार के मामले में सकारात्मक परिवेश दिखाने वाले दुनिया के चार शीर्ष देशों में भारत भी शामिल है। भारत के अलावा केवल जापान, चीन और ताइवान में रोजगार को लेकर सकारात्मक परिदृश्य पाया गया है।
