बरेली: समाधान के लिए 'कागजों' में बहाना...आधी हकीकत आधा फसाना
मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। सीधे सीएम से शिकायत का मजबूत जरिया बना आईआरएस ''आधी हकीकत आधा फसाना'' बनकर रह गया है। जिले में आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में फर्जीवाड़े के हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। जिम्मेदार मौके पर नहीं जा रहे हैं और न ही पीड़ितों से बातकर संतुष्ट कर रहे हैं। ऐसे में असल मायने में उनका दर्द बरकरार है, जबकि कागजों में फर्जी रिपोर्ट लगाकर समस्या का समाधान कर दिया जा रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि जिम्मेदारों की ओर से लगाई गई रिपोर्ट के आधार पर फरियादियों से बात कर की गई क्रॉस चेकिंग में सामने आया फर्जीवाड़ा हकीकत बयां कर रहा है।
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इस तरह की गड़बड़ियां सामने आने के बाद क्रॉस चेकिंग करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट राकेश गुप्ता भी हैरत में हैं। क्रॉस चेकिंग में बहेड़ी क्षेत्र के एक फरियादी ने बताया कि उनका जमीन का विवाद चल रहा है। समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ। इसी तरह से नवाबगंज में एक पीड़ित का मामला रुपये के लेनदेन से जुड़ा था। रिपोर्ट में दोनों मामले निस्तारित थे, जबकि हकीकत में समस्या जस की तस है। यह दो मामले महज बानगी हैं।
ऐसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर आने वाली शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। वहीं, प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच डीएम जनता दर्शन में जिले भर से आने वाले पीड़ितों के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हैं। यह प्रार्थना पत्र भी आईजीआरएस पोर्टल पर अपलोड होते हैं। एक सप्ताह पूर्व डीएम ने इसका नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट को बनाया है। नोडल अधिकारी बनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने इन मामलों को अनुमोदित करने के दौरान क्राॅस चेकिंग की, जिनमें तहसील स्तर से जांच कर भेजी गई रिपोर्ट में यह बताया कि पीड़ित संतुष्ट है, जब सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी समस्या जस की तस है। जिम्मेदारों ने गलत तरीके से समस्या के निस्तारण की रिपोर्ट लगाकर आगे बढ़ा दी।
ऐसे निस्तारित होती है शिकायत
सरकारी व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह बनाने के लिए योगी सरकार ने आईजीआरएस की व्यवस्था लागू की थी। इसमें कोई भी पीड़ित घर बैठे ऑनलाइन शिकायत जिले के अफसरों के साथ ही सीएम से भी कर सकता । इस पोर्टल पर आने वाली शिकायत को संबंधित के पास निस्तारण के लिए भेजी जाती है फिर जिम्मेदार मौके पर जाकर समस्या का निस्तारण कर ऑनलाइन रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करते हैं।
इन मामलों की शिकायतों अधिक
डीएम के जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में राजस्व की शिकायतें अधिक आती हैं। इसमें जमीन के विवाद, पैमाइश, कब्जेदारी आदि के मामले रहते हैं। पुलिस की ओर से सुनवाई नहीं होने, वृद्धावस्था पेंशन के मामले भी हैं।
आपसी तालमेल का अभाव
जनता दर्शन में आने वाले मामलों में जांच के लिए भेजे जाने वाले प्रार्थना पत्रों के निस्तारण में विभागों के बीच तालमेल का अभाव भी दिखता है। सिटी मजिस्ट्रेट बताते हैं कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिसमें कई विभाग होते हैं। ऐसी स्थिति में विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं।
एक सप्ताह के अंदर जनता दर्शन में आने वाले करीब 250 मामलों का अवलोकन किया गया। रिपोर्ट के अनुमोदन के दौरान क्राॅस चेकिंग की गई। पीड़ितों ने कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ। रिपोर्ट में निस्तारण कर दिया। इन मामलों को दोबारा जांच के लिए संबंधित को भेजा जा रहा है। एक दिसंबर से गड़बड़ी पर प्रतिकूल प्रविष्ट संबंधित को भेजी जाएगी। यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी-राकेश गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट/जनता दर्शन मामलों के नोडल अधिकारी।
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