लखनऊ: प्रो. पाठक केस और आयुष कॉलेजों में दाखिले पर ईडी की भी नजर, जानिये क्या होगी कार्रवाई
लखनऊ कार्यालय से केस के संबधित कागजात दिल्ली मुख्यालय भेजे गए
लखनऊ, अमृत विचार। आयुष कालेजों के दाखिले में व्यापक पैमाने पर हुई गड़बड़ियों व कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी अपनी नजरें टिका दी है। इस बाबत लखनऊ कार्यालय की ओर से आवश्यक कागजात जुटाकर मुख्यालय (दिल्ली) भेजे गए हैं। वहां पूरे मामले का परीक्षण किया जा रहा है। ईडी सूत्रों के मुताबिक जांच में यह देखा जाएगा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लान्ड्रिंग का उल्लंघन तो नहीं किया गया है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि एक शिकायत के बाद हुई विभागीय जांच में यह सामने आया कि नीट (चिकित्सा स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए परीक्षा) परीक्षा में कट-आफ अंक प्राप्त किए बगैर प्रदेश के आयुष कालेजों में बड़ी संख्या में दाखिला हुए। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच का फैसला लिया और एसटीएफ को जांच सौंपी। छानबीन में पता चला कि 891 छात्रों ने नीट परीक्षा में कट-आफ अंक प्राप्त किए बगैर आयुष कालेजों में दाखिलालिया। इसमें 22 छात्र ऐसे मिले, जिन्होंने परीक्षा दी नहीं और प्रवेश हो गया।
जाहिर है इसमें व्यापक स्तर भ्रष्टाचार से इनकार नहीं किया जा सकता है। बहरहाल सभी 891 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। एसटीएफ ने इस मामले में 12 विभागीय लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसी प्रकार कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक पर भी व्यापक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। बीते दिनों प्रो. पाठक व उनके सहयोगियों के खिलाफ इंदिरा नगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था। एसटीएफ की जांच में छपाई व निर्माण कार्यों का ठेका देने में नियमों की धज्जियां उड़ाने की बात सामने आयी है।
प्रो. पाठक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं
एसटीएफ को भ्रष्टाचार के दस्तावेजी सबूत भी हाथ लगे हैं। इस मामले में प्रो. पाठक के करीबी अजय मिश्र व अजय जैन के गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है। यह बात दीगर है कि प्रो. पाठक के खिलाफ अभी कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। एसटीएफ ने उन्हें पूछताछ के लिए दो बार नोटिस भेजा है, लेकिन वह अभी सामने नहीं आये हैं।
सीबीआई से केस हाथ में लेने का संकेत नहीं
बीते दिनों इनमें से 9 लोगों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। इस बीच राज्य सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की संस्तुति की है। हालांकि अभी तक इस मामले को हाथ में लेने का सीबीआई की ओर से कोई संकेत नहीं मिला है।
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