विवाद उचित नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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आगामी 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मंदिर के निर्माण में लगभग 200 करोड़ रूपये के खर्च का अनुमान है लेकिन जिस तरह से दान देने वाले सामने आ रहे हैं,उससे लगता है कि निर्माण मे होने वाले व्यय से बहुत अधिक राशि दान …

आगामी 5 अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन के साथ ही राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। मंदिर के निर्माण में लगभग 200 करोड़ रूपये के खर्च का अनुमान है लेकिन जिस तरह से दान देने वाले सामने आ रहे हैं,उससे लगता है कि निर्माण मे होने वाले व्यय से बहुत अधिक राशि दान में आ जाएगी। राममंदिर बनाने में बहुत सारी ऐसी चीजों का प्रयोग होगा, जिससे मंदिर के इतिहास विकास को पता करने में सहजता हो। इसलिए इस बार अब जो मंदिर निर्माण होगा उसमें एक टाइम कैप्सूल बनाकर 200 फिट नीचे डाला जाएगा। मंदिर निर्माण के सिलसिले में उसके आकार व स्वरूप का निर्धारण ट्रस्ट ही करेगा, लेकिन इसे पुराने विवाद से जोड़कर देखना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

सभी अपने को कार्यक्रम में शामिल महसूस कर सकें, इसके लिए भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए दूरदर्शन के जरिये सजीव प्रसारण की व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में 268 मेहमान हिस्सा लेंगे जिसमें राम मंदिर आंदोलन से जुड़े भाजपा के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आदि शामिल हैं। इनमें से कई लोग बाबरी विध्वंस के आरोपी हैं।

यूं तो प्रधानमंत्री किसी एक वर्ग या पार्टी के नहीं पूरे देश के होते हैं, यह बात बार-बार कही भी जाती है। धर्मनिरपेक्ष देश के मुखिया को अपनी धार्मिक आस्थाएं सार्वजनिक तौर पर दर्शाने से बचना चाहिए और मंदिर निर्माण जैसे कार्यक्रम से दूरी बनानी चाहिए, निजी तौर पर किसी के भी भक्त हों. सार्वजनिक तौर पर उनका हर धर्म से निरपेक्ष भाव रहना चाहिए। लेकिन यह सैद्धांतिक बात आज राजनीति में फिट नहीं बैठती है, जब चुनाव ही इस मुद्दे पर जीते या हारे जाते हैं कि मंदिर कौन बनवा सकता है, कौन नहीं। इसलिए किसी को इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं लग रहा।

उच्चतम न्यायालय में लगातार हुई सुनवाई के बाद फैसला आया कि अयोध्या की विवादित भूमि पर हिंदू पक्ष का अधिकार है और इसके बाद से उम्मीद जताई जा रही थी कि वहां शीघ्र ही राममंदिर बनाने की शुरुआत हो जाएगी। कोरोना के कारण मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन में जरूर थोड़ी देर हुई। कुल मिलाकर राम मन्दिर को लेकर जो भी विवाद था, वह अपनी अंतिम तार्किक परिणति को प्राप्त हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंदिर का भूमि पूजन करने वाले हैं। अब इसे अनावश्यक किसी विवाद से जोड़ने से बेहतर होगा कि ट्रस्ट उसे दुनिया भर का सबसे प्रतिष्ठित मंदिर होना सुनिश्चित करे।