वैज्ञानिक नजरिया जरूरी

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना पर काबू पाने के लिए दुनिया में जितनी कोशिशें हो रही हैं, उनसे उम्मीद है कि जल्द ही इसकी वैक्सीन बना ली जाएगी। कोरोना का इलाज तो ढूंढ लिया जाएगा, लेकिन मूर्खता, अंधविश्वास और अतार्किकता हमेशा से लाइलाज रहे हैं और आगे भी रहेंगे। बिहार से लेकर असम तक कई राज्यों से ‘कोरोना माई’ …

कोरोना पर काबू पाने के लिए दुनिया में जितनी कोशिशें हो रही हैं, उनसे उम्मीद है कि जल्द ही इसकी वैक्सीन बना ली जाएगी। कोरोना का इलाज तो ढूंढ लिया जाएगा, लेकिन मूर्खता, अंधविश्वास और अतार्किकता हमेशा से लाइलाज रहे हैं और आगे भी रहेंगे। बिहार से लेकर असम तक कई राज्यों से ‘कोरोना माई’ की पूजा की घटनाएं सामने आ रही हैं। अंधविश्वास की महामारी से कई राज्य प्रभावित हैं।
हमारे देश में बीमारियों को माता से जोड़ने का इतिहास पुराना है। चेचक को आज भी बड़ी माता और छोटी माता कहा जाता है कई जगह शीतला माता भी कहा जाता है।

हालांकि जानकार बताते हैं कि बीमारी में देवी माता जैसा कुछ नहीं होता, लोग थोड़ा आराम करें, पोष्टिक आहार लें और दवाइयों से ठीक हो सकते हैं लेकिन हमारे देश की संस्कृति में इस तरह की प्रार्थना और पूजा की आदत घरों में बचपन से बना दी जाती है, तो सारी जिंदगी हमारे साथ रहती है। जनता कभी अशिक्षा, कभी अंधविश्वास और कभी गरीबी के कारण नीम हकीमों के चंगुल में आसानी से फंस जाती है।

देश में कोरोना जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसमें यह आशंका बलवती हुई है कि गरीब आबादी जांच से लेकर इलाज का खर्च कैसे उठाएगी, और तब इसी तरह झाड़-फूंक, टोटके, मंत्र आदि के जाल में फंसेगी। जब सांसद ही हनुमान चालीसा के पाठ सुझाएंगे तो जनता को वैज्ञानिक नजरिया अपनाने की सीख कौन देगा। किसी को हनुमान चालीसा पढ़ना हो या ताबीज बंधवाना हो, यह उसकी निजी पसंद और विचार होना चाहिए। आज हम दुनिया में तीसरे नंबर के कोरोना प्रभावित देश हैं, लेकिन हमारी सरकार का आत्मविश्वास देखिए, अब भी कह रही है कि भारत ने कोरोना का डटकर मुकाबला किया।

सरकार क्या अनलॉक के दौर में तमाम रियायतें देकर अपनी जिम्मेदारियों से बरी हो जाएगी। सरकार कम से कम ऐसा कुछ न करे कि लोग अंधविश्वासों का शिकार हो जाएं। कुछ नेताओं ने गोबर और गोमूत्र से कोरोना भगाने का नुस्खा पेश किया था। कुछ दिनों पहले केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पापड़ का प्रचार करते दिखे थे, जिसमें वे दावा करते हैं कि यह पापड़ कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव में कारगर साबित होगा। यदि ऐसे ही अफवाहें जारी रहीं तो इस महामारी काल में अंधविश्वास भी एक बड़ा लूटने वाला व्यवसाय बन जाएगा, जो बेहद ख़तरनाक है।