व्हाट्सएप ने हाईकोर्ट को बताया- बिना उचित आदेश के न्यायिक अधिकारी के अश्लील वीडियो पर कार्रवाई संभव नहीं 

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। सोशल मीडिया मंच व्हाट्सएप ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह न्यायिक अधिकारी के महिला के साथ कथित ‘यौन कृत्य’ वाले वीडियो के प्रसारण के खिलाफ विनिर्दिष्ट मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाने और उचित आदेश पारित किए जाने बिना कार्रवाई नहीं कर सकता।

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न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की अदालत एक पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसकी पहचान गुप्त रखने की अनुमति अदालत ने दी है। इसी मामले में व्हाट्सएप ने अपना पक्ष रखा। याचिका में ‘नौ मार्च 2022 के कथित’’ वीडियो के प्रसार और प्रसारण पर स्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

उक्त वीडियो 29 नवंबर को सामने आया था। अदालत ने 30 नवंबर को वीडियो के साझा करने और 'पोस्ट' करने पर रोक लगा दी थी और ऑनलाइन मंच से हटाने को कहा था। व्हाट्सएप का पक्ष रखने के लिए शुक्रवार को पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘ वे हमसे वह उम्मीद कर रहे हैं जो हम करने की स्थिति में नहीं हैं।

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने भी कहा है कि हम तबतक ऐसा नहीं कर सकते जबतक कि फोन नंबर ...अदालत द्वारा ऐसा करने का आदेश न मिले। वे अदालत को (फोन नंबर)दें और उसके बाद अदालत आदेश पारित कर सकती है।’’ निजी एक्सचेंज में यूआरएल या वेब लिंक नहीं होते हैं जिसपर गौर करते हुए न्यायमूर्ति वर्मा ने वादी के वकील को वह फोन नंबर देने के लिए समय दिया जिससे वीडियो साझा किया गया।

केंद्र सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता अजय दिगपाल ने सूचित किया कि ‘‘अनुपालन हलफनामा’’ दाखिल किया गया है और फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों द्वारा कार्रवाई की गई है। वादी ने अदालत से कहा कि पिछले आदेश के तहत पक्षकारों द्वारा उपचारात्मक कार्रवाई की गई।

अदालत ने वादी को उन यूआरएल की जानकारी देने की अनुमति दे दी जिनपर अब भी वीडियो है। यूट्यूब के स्वामित्व वाले गूगल ने कहा कि जानकारी मिलने पर आपत्तिजनक सामग्री वाले नए यूआरएल को भी हटाया जाएगा।

वादी के पक्ष को अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने रखा। अंतरिम आदेश पारित करते हुए अदालत ने कहा कि वीडियो का प्रसारण कई कानूनों का उल्लंघन है और साथ ही वादी के निजता के अधिकार को नुकसान पहुंचाता है, ऐसे में एकपक्षीय निषेध का आदेश वांछित है।

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