बागेश्वर: ऊनी वस्त्रों समेत पंखी, दन, चुटके का पुश्तैनी काम दे रहा रोजगार, नए अवसरों की तलाश
बागेश्वर, अमृत विचार। जनपद में शीतलहर का प्रकोप होने लगा है। इसके साथ ही कांडा तहसील के थाला गांव में बने ऊनी वस्त्रों की मांग बढ़ने लगी है। जौलजीवी मेले में व्यवसाय करने के बाद अब यहां की महिलाएं उत्तरायणी मेले की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करके ऊनी वस्त्रों समेत पंखी, दन, चुटके का निर्माण कर रहे हैं।
थाला गांव में भोटिया जनजाति के लोग अब भी अपने परंपरागत उद्योग में लगे हैं। गांव की खासियत है कि प्रत्येक घर की महिला अब भी इस काम में जुटी रहती है। गांव में खेती न के बराबर होती है तथा यहां के परिवारों का आर्थिक आधार ही ऊनी वस्त्रों का निर्माण है। खड़ी पहाड़ी में गांव के होने के कारण यहां पर खेती की संभावना नहीं रहती है। गांव की मुन्नी देवी, कांति देवी बताती हैं कि उनके पूर्वज इसी काम को करते थे। इसकी मांग भी काफी अधिक होती थी।
अब मशीनी युग होने के कारण इसकी मांग में कमी आई है। सरकार भी उनके इस उद्योग को प्रोत्साहन नहीं देती है। उनका कहना है कि अब भी कई लोग उनके बने उत्पादों पर विश्वास करते हैं तथा उन्हें इसकी डिमांड देते हैं। कहा कि उन्हें ग्राहक एक बार डिजायन दिखा दे तो ये उसके आधार पर उसकी पसंद का उत्पाद बना लेते हैं।
उनका कहना है कि उनके उत्पाद की मांग अधिक है लेकिन बाजार न मिलने व सरकार द्वारा इस ओर ध्यान न देने के कारण उनका माल ग्राहक तक नहीं पहुंच पाता है। वर्तमान में वे मेलों में ही अपने उत्पाद की बिक्री कर सकते हैं। वर्तमान में महिलाओं द्वारा उत्तरायणी मेले के लिए गर्म कपड़ों के अलावा पंखी, दन, चुटके, पश्मीना आदि का निर्माण किया जा रहा है।
युवा पीढ़ी का हो रहा मोहभंग
महिलाओं का कहना है कि पहले महिलाएं घर में वस्त्र निर्माण करती थी। पुरुष गांवों में जाकर इनकी बिक्री करते थे लेकिन अब युवा पीढ़ी फेरी व्यवसाय करने में शरमा रहे हैं।
दन व चुटके की लाइफ सौ साल से अधिक
बागेश्वर। मुन्नी देवी बताती हैं कि उनके द्वारा बनाए गए दन, थुलम आदि की लाइफ सौ साल से अधिक होती है। जबकि मशीन से बने सस्ते उत्पादों की आयु इतनी नहीं होती है। ये पूर्णतया आरगेनिक वस्त्र का निर्माण करते हैं।
थाला की महिलाएं समूह के माध्यम से बेहतरीन कार्य कर रही हैं। उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही नई पीढ़ी को फैशन डिजायनिंग का कोर्स कराया जाएगा।
- संगीता आर्या, जिला विकास अधिकारी, बागेश्वर
