चीन का दुस्साहस

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Edited By Amrit Vichar
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चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पार करने की कोशिश की जिसका भारत के जवानों ने दृढ़ता से जवाब दिया और उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया। यह क्षेत्र भारत के लिए सामरिक महत्व का है। चीन 2006 से लगातार तवांग क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अपना दावा जता रहा है। इसे लेकर चीन व भारत के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती है।

मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद को बताया कि चीन के सैनिकों ने 9  दिसंबर को तवांग सेक्टर में यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति बदलने का एकतरफा प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को चीनी पक्ष के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है। सेना के एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल सीबी पोनप्पा ने कहा कि हमने उन्हें उस जमीन से खदेड़ दिया, जिसे वे हड़पना चाहते थे। इससे पहले मई 2020 में जब पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी तब भारत-चीन के बीच सीमा विवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। 

इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक वार्ताओं का दौर भी चला और सीमा पर हालात सामान्य होने की बात कही गई। लेकिन तवांग की इस ताजा घटना ने सीमा विवाद को लेकर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर में तरह की घटनाएं क्यों होती हैं। पिछले दिनों पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अक्साई चिन और सियाचिन ग्लेशियर के बीच के सामरिक इलाके में 200 से अधिक नए शेल्टर बनाए हैं। नवंबर 2019 में सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला था कि चीन ने डोकलाम से नौ किलोमीटर की दूरी पर भूटान की घाटी में स्थित अमो चू घाटी में एक गांव बसा लिया है। 

जून 2020 को लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच तीखी झड़प हुई थी। फरवरी 2021 में भारत और चीन के बीच एक करार हुआ था। तय हुआ था कि दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के इलाके से पीछे हटेंगी। तवांग की ताजा झड़प का सबक है कि चीन भारत को अपने जाल में फंसाने की साजिश रच रहा है। भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना को करारा जवाब दिया है। यानि चीनी गतिविधियों को लेकर भारत सतर्क है और चीन के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी है। फिर भी दोनों देशों को विश्वास निर्माण कायम कर वास्तविक नियंत्रण रेखा के निर्धारण के बारे में ठोस बात करनी होगी।