बड़ी राहत
देश में लंबे समय के बाद आखिरकार खुदरा महंगाई दर के बाद थोक महंगाई दर भी घटी है। ये महंगाई की मार से त्रस्त आम जनता व सरकार के लिए राहत भरी बड़ी खबर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक डब्ल्यूपीआई आधारित थोक महंगाई दर नवंबर महीने में घटकर 21 महीने के निचले स्तर 5.85 फीसदी पर आ गई है।
थोक महंगाई दर 19 महीने तक दहाई अंकों में रहने के बाद अक्टूबर में घटकर 8.39 फीसदी पर आ गई थी जबकि नवंबर 2021 में थोक महंगाई दर 14.87 फीसदी रही थी। इससे पहले सोमवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक देश में खुदरा महंगाई दर नवंबर में घटकर 11 महीने के निचले स्तर 5.88 फीसदी पर आ गई, जबकि अक्टूबर में यह 6.77 फीसदी थी।
मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी से खुदरा व थोक महंगाई दर घटी है। खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के तय लक्ष्य के भीतर आ गई है। आरबीआई ने देश में महंगाई दो से छह फीसदी के दायरे में रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
गौरतलब है कि आरबीआई महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मई 2022 से पांच बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर चुकी है। आखिरकार आरबीआई के उठाए गए कदमों का असर खुदरा महंगाई दर पर दिखाई दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य उभरती और कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है। फिर भी देश में बढ़ती महंगाई पर काबू पाने की कोशिशों का असर नजर नहीं आ रहा था।
इस बीच सरकार ने महंगाई पर काबू पाने के लिए जरूरी कदम उठाए। अनाज, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों को नरम करने के लिए व्यापार से संबंधित उपयुक्त उपाय किए गए। केंद्र सरकार ने गेहूं की कीमतों में कमी लाने के उद्देश्य से इसका निर्यात रोक दिया था जिसके बाद गेहूं के दाम चार से आठ प्रतिशत तक टूट गए थे।
इस्पात और प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ कच्चे माल पर भी आयात शुल्क घटाने का निर्णय लिया गया। मार्च, 2024 तक के लिए सालाना 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर सीमा शुल्क तथा सैस हटाने की घोषणा की। अब खुदरा व थोक महंगाई दर घटने के बाद आने वाले महीनों में सरकार के उपायों के प्रभाव को और अधिक महसूस किए जाने की उम्मीद है। महंगाई काबू में आने के बाद जीडीपी में सुधार से नौकरियों के मौके भी बढ़ेंगे।
