बरेली: बाजार से चाइनीज राखियां गायब, सूरत व कोलकाता की छाईं

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बरेली,अमृत विचार। गलवान घाटी में चीन द्वारा की गई नापाक हरकत का असर इस बार राखी बाजार पर साफ दिख रहा है। बाजार से चाइनीज राखियां गायब हो गई हैं। इस बार सूरत और कोलकाता की मेटल व हैंड क्राफ्ट से बनीं राखियां खूब पसंद की जा रही हैं। स्वदेशी राखियां बाजार में छाई हुई …

बरेली,अमृत विचार। गलवान घाटी में चीन द्वारा की गई नापाक हरकत का असर इस बार राखी बाजार पर साफ दिख रहा है। बाजार से चाइनीज राखियां गायब हो गई हैं। इस बार सूरत और कोलकाता की मेटल व हैंड क्राफ्ट से बनीं राखियां खूब पसंद की जा रही हैं। स्वदेशी राखियां बाजार में छाई हुई हैं। इन रखियों की कीमत10 रुपये से लेकर 300 रुपये तक है।

राखियों में भैया-भाभी और लुम्बा राखी की डिमांड भी खूब है। जो 200 रुपये से 300 रुपये तक की है। इस बार रक्षाबंधन त्यौहार पर पर्स के अलावा रेडीमेड पान भी छाए हुए हैं। पान के अंदर रोली, चावल, मिश्री, चंदन उपलब्ध है। इनकी कीमत बाजार में 30 रुपये से लेकर 70 रुपये तक है। राखियों में गणेश मेटल, फ्लावर, कृष्ण मेटल पीस, साईं मेटल पीस, मेटल कछुआ राखी भी बच्चों को खासी पसंद आ रही है। व्यापारी बताते हैं कि चाइना का माल सस्ता आता था, लेकिन इस बार स्वदेशी बाजार में तैयार माल की बिक्री भी खूब हो रही है।

कार्टून कैरेक्टर की राखियां बनी पसंद
चाइना से बच्चों के लिए भी राखियां खूब आती थीं लेकिन इस बार नहीं आई है। स्वदेश में तैयार की गई कार्टून कैरेक्टर की राखियां भी बच्चों को भी खूब पसंद आ रही हैं।

“चाइना से इस बार राखी का कच्चा माल नहीं आया है। इसके बावजूद अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है। भारतीय बाजार में बेहतर कच्चा व कम दाम का माल तैयार किया गया है।” -अकिंत देवल, राखी विक्रेता

“राखी की वैरायटी चाइना से माल नहीं आने के कारण कुछ कम हुई है। इसका प्रभाव ग्राहकों पर अधिक नहीं पड़ा है। स्वदेशी राखियां भी नई डिजाइन की हैं। इन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं।” -तरुन, राखी विक्रेता

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