उप्र: बिजली दर बढ़ाने को नियामक आयोग में सुनवाई के विपरीत छपवा दिया विज्ञापन
लखनऊ, अमृत। बिजली दरों में बढ़ोतरी हो सके इसके लिए उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) सभी कंपनियों हर संभव कोशिश में लगी हुई हैं। इसके लिए कंपनियों की ओर से शुक्रवार को अखबारों में नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को लेकर विगत दिनों में हुई सुनवाई के विपरीत विज्ञापन छपवा दिया। जिस …
लखनऊ, अमृत। बिजली दरों में बढ़ोतरी हो सके इसके लिए उत्तर प्रदेश पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) सभी कंपनियों हर संभव कोशिश में लगी हुई हैं। इसके लिए कंपनियों की ओर से शुक्रवार को अखबारों में नियामक आयोग में वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को लेकर विगत दिनों में हुई सुनवाई के विपरीत विज्ञापन छपवा दिया।
जिस पर उपभोक्ता परिषद ने तुरंत संज्ञान लेते हुए नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर दिया। इस दौरान नियामक आयोग के चेयरमैन को कंपनियों की सभी कारस्तानियों से अवगत कराया गया। आयोग की तरफ से आश्वासन दिया गया कि पूरे मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनिया टैरिफ बढ़ोतरी प्रस्ताव दाखिल नहीं कर पायी हैं। इसलिए अपनी खीज मिटा रही हैं और मामले को उलझा रही हैं। अभी जो बिजनेस प्लान आयोग द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया, फिर क्यों टैरिफ प्रस्ताव बिजलेस प्लान के अनुमोदित डेटा पर आधारित होना है। इसका अखबारों में शुक्रवार को विज्ञापन छपवा दिया गया, जो कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने की साजिश है। बिजनेस प्लान और टैरिफ को घालमेल कर पावर कार्पोरेशन चालबाजी कर रहा है जो उसकी उपभोक्ता विरोधी नीति को दर्शाता है।
अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया गया की बिजली कंपनियों द्वारा वर्ष 2020-21 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) ट्रूअप वर्ष 2018-19 व वार्षिक परफारमेन्स रिव्यू वर्ष 2019-20 के बारे में जो विज्ञापन निकाला गया हैै। जिसमे बिजली कम्पनियो ने आयोग आदेशों का उलघन कर कुछ ऐसे बातें में छपवा दी है जो प्रदेश के उपभोक्ताओ को गुमराह करने वाली है।
छापे गए विज्ञापन में आयोग आदेशों के विपरीत यह प्रकाशित कराया गया है की, बहुवर्षीय टैरिफ विनयमावली 2019 के प्राविधान के अनुसार टैरिफ प्रस्ताव बिजलेस प्लान के अनुमोदित डेटा पर आधारित होना है,, मतलब की एआरआर आकड़ो पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं।
एक और सबसे चौंकाने वाली प्रकाशित बात यह है की आयोग को प्रस्तुत डाटा गैप के उतर में टैरिफ डिजाइन उपलब्ध है, इसका क्या मतलब महोदय सब मिलाकर आयोग के आदेशों का पूरी तरह उल्लंघन कर प्रदेश के उपभोक्ताओ को गुमराह किया गया है। उपभोक्ता परिषद् जनहित मे आयोग से मांग करता है की आयोग अविलम्ब कंपनियों द्वारा प्रकाशित विज्ञापन पर शुद्धिपत्र जारी कराने का कष्ट करें और डिस्कामों के इस कारनामे के लिए कठोर कदम उठाये।
