भारत आने वालों को उड़ान से पहले करानी होगी कोरोना जांच
नई दिल्ली। वंदे भारत तथा द्विपक्षीय समझौतों के तहत शुरू की गई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देश आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार उड़ान से पहले कोरोना जांच अनिवार्य करने की योजना बना रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकारी समाचार चैनल डीडी न्यूज पर एक साक्षात्कार में शुक्रवार रात …
नई दिल्ली। वंदे भारत तथा द्विपक्षीय समझौतों के तहत शुरू की गई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देश आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार उड़ान से पहले कोरोना जांच अनिवार्य करने की योजना बना रही है।
नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकारी समाचार चैनल डीडी न्यूज पर एक साक्षात्कार में शुक्रवार रात बताया कि पहले प्रयोग के तौर पर यह व्यवस्था लागू की जायेगी तथा बाद में इसका विस्तार किया जायेगा। इससे भारत आने के बाद उन यात्रियों को संस्थागत क्वारंटीन में रखने की जरूरत नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि इसके लिए पोर्टल तैयार कर लिया गया है। पहले प्रयोग के तौर पर इसे लागू किया जायेगा। प्रयोग सफल रहने के बाद इसे पूरी तरह लागू कर दिया जायेगा। यात्रियों को उड़ान पकड़ने से पहले जाँच करानी होगी। यदि रिपोर्ट निगेटिव है तो उन्हें संस्थागत क्वारंटीन के बदले घर में क्वारंटीन रहने के लिए कहा जायेगा। इससे राज्य सरकारों के क्वारंटीन संबंधी बुनियादी ढाँचों पर बोझ कम होगा और वे ज्यादा यात्रियों को आने की अनुमति दे सकेंगी।
पुरी ने बताया कि वंदे भारत मिशन के आज से शुरू हुये पाँचवें चरण में 900 से अधिक उड़ानों होंगी और इनकी संख्या 1,200 तक भी जा सकती है। पहले चरण में 64 उड़ानें थीं जबकि चौथे चरण तक इनकी संख्या बढ़कर 400 के पार पहुँच गई। सरकार की योजना आगे चलकर वंदे भारत मिशन को हम द्विपक्षीय समझौतों के तहत परिचालित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ने की है। सरकार ने अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ द्विपक्षीय समझौतों के तहत सीमित संख्या में यात्री उड़ानें शुरू की है।
एयर इंडिया का परिचालन खर्च 1,500 करोड़ कम हुआ
हरदीप सिंह पुरी ने सरकारी एयरलाइन के निजीकरण पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा “एयर इंडिया के परिचालन की लगात एक साल में करीब 1,500 करोड़ रुपये कम हो गई है। मार्गों और वेतन ढांचों को तर्कसंगत बनाकर लागत कम किया गया है।”
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के पायलटों का वेतन निजी विमान सेवा कंपनियों के पायलटों से अधिक था इसलिए इसमें कटौती की गई है। उड़ानों और यात्रियों की संख्या में कमी से विमान सेवा कंपनियों पर दबाव है। विमान सेवा कंपनियों पर दबाव पहले भी था। कोविड के कारण दबाव बढ़ गया है। उड़ानें दो महीने पूरी तरह बंद रहीं। उड़ानें नहीं होने से खर्चा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता बल्कि रखरखाव और नियमित जांच करनी होती है।
