बढ़ी बेरोजगारी दर
देश में नौकरी के अवसर घटते जा रहे हैं जबकि काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। चिंता की बात है कि दिसंबर में बेरोजगारी दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक, 18 दिसंबर को खत्म हुए सप्ताह में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर रिकॉर्ड 10.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।
इसी अवधि में ग्रामीण बेरोजगारी दर 8.4 प्रतिशत रही, जबकि नवंबर में यह दर 7.6 प्रतिशत थी। दिसंबर माह के बीते सभी तीन सप्ताह में बेरोजगारी दर आठ फीसदी से भी अधिक रही है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में यह बढ़कर 9.4 फीसदी पहुंच गई। हालांकि तीसरे सप्ताह में थोड़ा सुधार हुआ और दर थोड़ी खिसककर 8.9 फीसदी पर आ गई।
साप्ताहिक बेरोजगारी दर से यह संकेत मिल रहा है कि चारों सप्ताह की औसतन बेरोजगारी दर में कोई सुधार आने की उम्मीद नहीं है। साप्ताहिक दरें कुछ हद तक और डराने वाली हैं। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर शहरी इलाकों से काफी कम है। बेरोजगारी दर में हालिया वृद्धि को लेकर इसका आंकड़ा नहीं है कि कितने लोग कृषि पर निर्भर हैं जो खेती के मौसम के अनुरूप रोजगार पाते हैं।
ग्रामीण रोजगार दर का मतलब यह है कि ग्रामीण भारत पहले की तुलना में अधिक रोजगार पैदा कर रहा है, फिर भी पर्याप्त रोजगार प्रदान करने में सक्षम नहीं है। 18 दिसंबर तक ग्रामीण भारत में रोजगार दर 39 फीसदी थी। दिसंबर के पहले तीन हफ्तों में औसत रोजगार दर 38.6 फीसदी थी। ये अनुमान नवंबर 2022 में दर्ज ग्रामीण भारत में 37.5 फीसदी रोजगार दर के साथ बहुत अच्छी तरह से तुलना करते हैं।
इसलिए कृषि सहित ग्रामीण भारत नवंबर की तुलना में बहुत अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। उधर श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) में तेजी से वृद्धि हुई है। 11 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 39 फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज की गई। इसके अगले सप्ताह यानी 18 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में यह दर 38.8 फीसदी हो गई। आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
फिर भी मार्च तक आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से कई सेक्टर में नौकरियां बढ़ सकती हैं। जानकारों के मुताबिक रोजगार में बढ़ोतरी वाले क्षेत्रों पर ध्यान देकर स्थिति संभाली जा सकती है। सरकार को ऐसे क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरूरत है, जहां ज्यादा कामगारों की जरूरत होती है। स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे सर्विस सेक्टर में निजी निवेश को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
