आतंकवाद का मुकाबला

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी और उनके आका घाटी में बढ़ रही शांति और विकास को पचा नहीं पा रहे हैं। पिछले दिनों लश्कर-ए-तैयबा का एक हिस्सा माने जाने वाले उग्रवादी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने बारामूला जिले के लिए नामित भाजपा पदाधिकारियों को धमकी दी।

घाटी में सौहार्द्रपूर्ण माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है। ड्रोन से हथियार गिराने की घटनाएं भी सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। जिस तरह से जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की सक्रियता बढ़ी, यह हम सब के लिए चिंता का विषय है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल रही है और जम्मू क्षेत्र में फैल रहा आतंकवाद इसकी  सबसे बड़ी विफलता है। जम्मू के सिधरा इलाके में सुबह हुई मुठभेड़ ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने संबंधी सरकार के दावों को झूठा साबित कर दिया।

उधर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की। जम्मू में बुधवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादियों के मारे जाने के बीच हुई बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगर आतंकी कश्मीर तक पहुंच जाते तो वे नए साल के मौके पर या उसके बाद 26 जनवरी पर कश्मीर में किसी आतंकी वारदात को अंजाम दे सकते थे। लेकिन सुरक्षाबलों ने उनकी इस नापाक साजिश को नाकाम कर दिया। ध्यान रहे इस साल अभी तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 56 विदेशी आतंकवादियों मारे गए हैं।  साथ ही आतंकवादी संगठनों में शामिल होने वाले 102 स्थानीय युवाओं में से 86 मारे गए हैं।

यह पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी संख्या है। ऐसे में जब पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों के जरिए घाटी में एक बार फिर से आतंकवाद को बढ़ाना चाहता है,  कश्मीरी आतंकवाद रोकने के लिए पाकिस्तान को मजबूर करना जरूरी है। टीआरएफ असल में आईएसआई का ऐसा नाकाम दांव है, जिसके जरिए वो कश्मीर में आतंकवाद को घरेलू और धर्मनिरपेक्ष साबित करने की कोशिश कर रही है। हकीकत तो ये है कि आईएसआई ने टीआरएफ को एक अलग तरह की रणनीति के तहत बनाया है, जो अन्य आतंकवादी संगठनों से बिल्कुल अलग है  टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा की ही एक शाखा है, जिसके जरिए, सीमा पार से चलाए जा रहे आतंकवादी अभियान पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है, ताकि कश्मीर में आतंकवाद के इस नए नाम को ‘स्वदेशी’ और ‘घरेलू’ साबित किया जा सके।  पाकिस्तान को यह संदेश देना आवश्यक है कि हमारी सेना व सुरक्षा बलों में इतनी क्षमता है कि आतंक और आतंक की जड़ दोनों को उखाड़ सकते हैं।