बरेली: अपडेट नहीं रखा बही-खाता तो भरना पड़ेगा जुर्माना

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। प्रदेश भर में व्यापारियों के विरोध के बाद शासन के निर्देश पर चलाया जा रहा जीएसटी के छापों का अभियान तो रुक गया है लेकिन अफसरों की सक्रियता अब भी कम नहीं हुई है। पंजीकृत व्यापारियों पर लगातार अपने स्टॉक और खरीद-फरोख्त का रिकॉर्ड अपडेट रखने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें आगाह किया जा रहा है कि टैक्स भरते समय दी गई जानकारी की पुष्टि के लिए कभी भी उनका रिकॉर्ड चेक किया जा सकता है। कोई गड़बड़ी निकलने की स्थिति में उन पर जुर्माना भी डाला जा सकता है।

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मंडल में करीब 25 हजार व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हैं। सरकार की ओर से इन व्यापारियों को टैक्स जमा करने में कई सहूलियत दी गई हैं फिर भी टैक्स चोरी के मामले कम नहीं हो रहे हैं। एडिशनल ग्रेड-1 वीडी शुक्ला बताते हैं कि अनियमितता रोकने के लिए प्रदेश के वाणिज्यकर विभाग और केंद्र के वस्तु एवं सेवा कर विभाग को भी अधिकार दिए गए हैं। इसलिए अफसर विभाग में जमा किए गए टैक्स और टर्नओवर की कभी भी जांच कर सकते हैं। इसलिए पंजीकृत व्यापारियों को अपनी दुकान या फैक्ट्री में स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर रखना अनिवार्य है। स्टॉक रजिस्टर में कौन सा माल कब और कहां से मंगाया गया, इसकी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। गलत जानकारी दर्ज होने पर ऐसे मामलों में जुर्माना भरना पड़ सकता है।

केंद्र सरकार भी रखती है नजर
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि जीएसटी के लागू होने के बाद सरकार ने प्रदेश के वाणिज्यकर विभाग और केंद्र के वस्तु एवं सेवा कर विभाग के बीच बेहतर तालमेल के लिए कार्यों का बंटवारा किया है जिसके तहत डेढ़ करोड़ से अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों पर राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की नजर रहती है। इससे कम, लेकिन 20 लाख से अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों में से 90 प्रतिशत पर राज्य व 10 प्रतिशत पर केंद्र सरकार नजर रखती है।

पहले मनमानी फिर करते हैं विरोध
एडिशनल ग्रेड-1 वीडी शुक्ला के मुताबिक कई व्यापारी रिटर्न भरते या टैक्स जमा करते समय जो टर्न ओवर बताते हैं, उसका उनके पास रिकार्ड अपडेट नहीं होता। मसलन, किसी दुकानदार के स्टॉक रजिस्टर में दो सौ तरह के इलेक्ट्रिक आइटम का रिकॉर्ड हैं, लेकिन उसकी दुकान में अगर 180 ही मिले तो शेष किसे बेचे, इसका रिकॉर्ड होना जरूरी है। स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर की जांच में जब इसी तरह की गड़बड़ी पकड़ी जाती है तो उसका विरोध किया जाता है।

इन नियमों के तहत होती है जांच
डिप्टी कमिश्नर ब्रजेश कुमार के मुताबिक नियम 67 के तहत अधिकारी व्यापारी से दुकान से संबंधित अभिलेख मंगाकर जांच कर सकते हैं। इसके अलावा नियम 71 के तहत अभिलेख या कोई भी अन्य सामान जब्त करते हुए भी जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस की भी सहायता ली जा सकती है। इसलिए बिक्री रजिस्टर को भी अपडेट रखने के लिए दुकानदार से कहा जा रहा है।

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