क्रांतिकारी पहल
मतदान का लगातार गिरता प्रतिशत हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है। तमाम अभियानों के बावजूद हर चुनाव में कई निर्वाचन क्षेत्रों में पचास प्रतिशत से भी कम मतदान हो पाता है। इस तरह जन प्रतिनिधित्व का मकसद ही अधूरा रह जाता है। चुनाव आयोग ने पिछले दिनों युवाओं और शहरी मतदाताओं में मतदान के प्रति उदासीनता को दूर करने पर काफी जोर दिया।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक पिछले आम चुनाव में करीब तीस करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए। लंबे समय से मांग उठती रही थी कि ऐसे लोगों के लिए मतदान का कोई व्यावहारिक उपाय निकाला जाना चाहिए। इसी सिलसिले में यह बात भी कही गई कि भारत ने सूचना तकनीकी के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किए हैं, इसलिए इन्टरनेट के जरिये वोट करने की सुविधा लागू की जाए।
उसी के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने घरेलू प्रवासियों के लिए ‘रिमोट वोटिंग मशीन’ यानी आरवीएम शुरू करने का प्रस्ताव पेश किया है। यानि गृह राज्य से बाहर रहने वाले मतदाता चुनाव में मतदान कर सकें इसके लिए चुनाव आयोग ने नई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन तैयार करवाई है जिसका प्रदर्शन 16 जनवरी को किया जाएगा। इस पर विचार-विमर्श के लिए आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है। आयोग ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे इस नई व्यवस्था को लागू करने से जुड़ी कानूनी, प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों के बारे में अपना नजरिया पेश करें।
रिमोट ईवीएम एक रिमोट पोलिंग बूथ से 72 निर्वाचन क्षेत्रों को संभाल सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त, राजीव कुमार ने इसे ‘चुनावी लोकतंत्र में भागीदारी को मजबूत करने के लिए परिवर्तनकारी पहल बताया है। इससे चुनाव में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। निस्संदेह आयोग की यह पहल सराहनीय है। मगर जिस तरह अभी तक ईवीएम को लेकर भ्रम बने हुए हैं, उसमें स्वाभाविक ही आरवीएम भी संदेह से परे नहीं होगी।
कांग्रेस ने इसे लेकर शुरू में ही विरोध जाहिर किया है। ध्यान रहे लोकतांत्रिक प्रणाली में राजनीतिक दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और गिरता मतदान प्रतिशत सभी राजनीतिक दलों के लिए भी खतरे की घंटी है। जैसा कि निर्वाचन आयोग ने दावा किया है, उससे लगता है कि उसने इन तमाम पक्षों पर गंभीरता से विचार कर लिया है। कई चुनाव विशेषज्ञ भी इसे एक क्रांतिकारी पहल मान रहे हैं। आरवीएम की कामयाबी लोकतंत्र की कामयाबी के लिए जरूरी है। इस कामयाबी के द्वारा ही ज्यादा से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर कर सकेंगे।
