भारत की ताकत
विज्ञान के क्षेत्र में भारत तेजी से विश्व के शीर्ष देशों में शामिल हो रहा है। 2015 तक हम 130 देशों के वैश्विक नवाचार सूचकांक में 81 वें नंबर थे और 2022 में 40 वें नंबर पर पहुंच गए हैं। भारत पीएचडी और स्टार्टअप इकोसिस्टम की संख्या के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। मंगलवार को भारतीय विज्ञान कांग्रेस के उदघाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि भारत का वैज्ञानिक समुदाय वह स्थान उपलब्ध कराएगा, जिसका देश हमेशा से हकदार रहा है।
वैज्ञानिकों में दुनिया को बदल डालने की ताकत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत में दो चीजें बहुतायत में हैं। पहली डेटा और दूसरी टेक्नोलॉजी। इन दोनों में भारत के विज्ञान को नई बुलंदियों पर पहुंचाने की ताकत है। अमृत काल में हमें भारत को आधुनिक विज्ञान की सबसे उन्नत प्रयोगशाला बनाना है। विज्ञान के प्रयासों को बड़ी उपलब्धियों में तभी बदला जा सकता है जब वे प्रयोगाशाला से निकलकर जमीन तक पहुंचे।
इसमें कोई दो राय नहीं विकास के पथ पर कोई देश तभी आगे बढ़ सकता है जब उसकी आने वाली पीढ़ी के लिए सूचना और ज्ञान आधारित वातावरण बने और उच्च शिक्षा के स्तर पर शोध तथा अनुसंधान के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। देश का विकास वहां के लोगों के विकास के साथ जुड़ा हुआ होता है। इसके मद्देनजर जरूरी हो जाता है कि जीवन के हर पहलू में विज्ञान-तकनीक और शोध कार्य अहम भूमिका निभाएं। अनुसंधान-आधारित विकास की विभिन्न तकनीकों को लागू करके वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।
ऐसे में सवाल है कि आखिर क्यों भारत शोध कार्यों के मामले में चीन, जापान जैसे देशों से पीछे है? ऐसी कौन-सी चुनौतियां हैं जो अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भारत की प्रगति के पहिए को रोक रही हैं? ध्यान रहे भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान का स्तर गिरता जा रहा है, क्योंकि शोध कार्यों के क्षेत्र में करियर उतना आकर्षक नहीं है, जितना अन्य क्षेत्रों में है। शोध कार्यों में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर राष्ट्रीय सुविधाओं के निर्माण की जरूरत है।
हालांकि विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है, फिर भी इस दिशा में और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। साथ ही उन विषयों पर काम करने की आवश्यकता है जो संपूर्ण मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं। याद रखना चाहिए यह विज्ञान ही है जिसके माध्यम से भारत अपने वर्तमान को बदल रहा है और भविष्य को सुरक्षित रखने का कार्य कर रहा है।
