जल प्रबंधन की चुनौती
चीन से आने वाली नदियां भारत के लिए चुनौती हैं। चीन जिस तरह काम कर रहा है, उससे चुनौती और बढ़ रही है। वहां की नदियों पर चीन लगातार बांध का निर्माण कर रहा है। कल यदि चीन नदियों का उपयोग हथियार के तौर करने लगा, तो हमारे पास विकल्प मौजूद रहना चाहिए। हालांकि हमारे इंजीनियर्स ने तत्परता से काम किया है और हम हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।
देश की चाहे नदियां हो या फिर प्राकृतिक जल स्रोत उनके अस्तित्व को बचाना, फिर पानी का उपयोग निर्धारित होना भी जरुरी है। मौजूदा हालातों में पानी की समस्या का समाधान जरुरी है। हमें तकनीक के सहारे जल प्रबंधन के मोर्चों पर खड़ा होना पड़ेगा। परंपरागत जल प्रबंधन की योजनाओं के साथ निचले स्तर तक काम करना होगा। केंद्र सरकार की दूरदर्शिता है कि आने वाले वक्त में जल संकट जैसी स्थिति निर्मित न हो, इस विजन के साथ अभी से तैयारियों में जुटी है।
अगले 25 वर्ष तक पानी की जरुरत को ध्यान में रखते हुए देशभर के जल संसाधन मंत्री गुरुवार व शुक्रवार को भोपाल में मंथन करेंगे। शहरों का विस्तार तेजी से हो रहा है। वर्ष 2020 तक भारत की लगभग 35 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी, वर्ष 2050 तक इसके दोगुना होने की संभावना है।
शहरों के तेजी से विकसित होने के साथ ही जल की मांग में वृद्धि देखी गई है। यानि निकट भविष्य में लोगों के समक्ष पानी की कमी या न्यूनता एक बड़ी चुनौती बन सकती है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने इतिहास के सबसे खराब जल संकट से जूझ रहा है। अधिकांश शहरों में जल की आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक है, इसलिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने की आवश्यकता है। देश में ‘जल है तो कल है’ की महत्ता को समझते हुए भविष्य में पानी के संकट से निपटने की शुरुआत हो चुकी है।
उल्लेखनीय है कि जल जीवन मिशन की घोषणा के वक्त 2019 में कुल 3 करोड़ 23 लाख परिवारों को पाइपलाइन से पानी मिलता था। वर्तमान में 10 करोड़ 56 लाख परिवारों को नल से जल मिल रहा है। ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल सुरक्षा की चुनौतियों के समाधान के मद्देनजर ‘5पी’ का मंत्र दिया था, जिसमें राजनीतिक इच्छा शक्ति, लोक वित्त, साझेदारी, जन भागीदारी और निरंतरता के लिए प्रेरणा शामिल है। उम्मीद है इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में भारत का जल सेक्टर मिशन 2047 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
