कपिल देव द लीजेंड : मां से मिली प्रेरणा, कप्तान बनने के बाद डरे हुए थे Kapil Dev...फिर ऐसे साकार किया करोड़ों लोगों का सपना
कपिल देव ने 356 इंटरनेशनल मैच में 9031 रन बनाए हैं और 687 इंटरनेशनल विकेट झटके हैं
नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कप्तान और लीजेंड कपिल देव आज अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं। कपिल देव का जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था। कपिल देव आज भले ही क्रिकेट की दुनिया से दूर हैं। लेकिन ,उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिसकी आज भी मिसाल दी जाती है। 1983 में कपिल की ही कप्तानी में भारत ने पहली बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया था। आज हर क्रिकेटर कपिल देव जैसा बनना चाहता है। एक कप्तान के तौर पर भी उन्होंने सिद्ध कर दिया था कि वे ऐसी टीम को विश्व चैंपियन बना सकते हैं, जिसके बारे में शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
कपिल देव का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रिकॉर्ड
कपिल देव ने 1994 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। कपिल देव ने अपने करियर में 434 टेस्ट और 253 वनडे विकेट लिए हैं। इसके अलावा उन्होंने 131 टेस्ट मैचों में 5248 और 225 वनडे मैचों में 3783 रन भी बनाए हैं। मतलब कि कपिल देव ने 356 इंटरनेशनल मैच में 9031 रन बनाए हैं और 687 इंटरनेशनल विकेट झटके हैं। कपिल के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी दर्ज है। एक कप्तान के रूप में एक पारी में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग फिगर की लिस्ट में कपिल सबसे ऊपर हैं। उन्होंने 1983 में वेस्टइंडी के खिलाफ एक पारी में 83 रन देकर नौ विकेट चटका दिए थे। कपिल को 1980 में अर्जुन अवॉर्ड, 1982 में पद्मश्री और 1991 में पद्म भूषण सम्मान मिला था।
3️⃣5️⃣6️⃣ intl. matches
— BCCI (@BCCI) January 6, 2023
9️⃣0️⃣3️⃣1️⃣ intl. runs
6️⃣8️⃣7️⃣ intl. wickets
India's 1983 World Cup-winning captain 🏆
Birthday wishes to Mr Kapil Dev - one of the finest all-rounders to have ever graced the game. 🎂 👏#TeamIndia | @therealkapildev pic.twitter.com/zrDcaR1wWV
कपिल देव की अगुवाई में भारत ने जीता था 1983 वर्ल्ड कप
दिग्गज कपिल देव की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम ने 25 जून 1983 को पहली बार वर्ल्ड कप जीता था। उस समय भारतीय टीम को ज्यादा तवज्जों नहीं दी जाती थी। लेकिन वर्ल्ड कप फाइनल में दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज को मात देकर कपिल देव की टीम ने करोड़ों लोगों का सपना साकार किया था। इस ऐतिहासिक विश्व कप पर ’83’ नाम की फिल्म भी बनी, जिसमें उनका किरदार रणवीर सिंह ने निभाया है।
पाकिस्तान दौरे से की थी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत
कपिल देव का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर (1978-1994) 16 साल का रहा। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे से इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरुआत की थी। यह मैच एक अक्टूबर 1978 को खेला गया था। इसी महीने 16 अक्टूबर को कपिल ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। यह मैच पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद में हुआ था। इसके 16 साल बाद कपिल ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उन्होंने अपना आखिरी वनडे मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर 1994 में खेला था।
…कपिल देव को मां से मिली प्रेरणा
चंडीगढ़ में जन्मे कपिल देव रामलाल निखंज की सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां थीं, जिन्होंने अपने बेटे को अभ्यास के लिए ग्राउंड पर भेजा और उनके खान-पान का विशेष ध्यान रखा। मां को क्या पता था कि उनका बेटा भारतीय क्रिकेट इतिहास का चेंजमेकर बनकर उभरेगा। कपिल देव बमुश्किल 14 साल के होंगे, जब उन्होंने डीएवी स्कूल के लिए खेलना शुरू किया था। दाएं हाथ के मध्यम गति के गेंदबाज ने देश प्रेम आजाद के मार्गदर्शन में क्रिकेट की बारिकियां सीखीं। 15 साल की उम्र में कपिल देव को बॉम्बे में एक लिव-इन कोचिंग कैंप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया, जिसका संचालन भारत के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर हेमू अधिकारी ने किया था। आखिरकार कपिल देव की मेहनत रंग लाई, जब उन्होंने 17 साल की उम्र में नवंबर 1975 में पंजाब के खिलाफ फर्स्ट क्लास डेब्यू किया। उस पदार्पण मुकाबले में कपिल देव ने छह विकेट चटकाकर हरियाणा को जीत दिलाने में अहम रोल अदा किया था।
मैं कप्तान बनने के बाद डरा हुआ था कि सीनियर खिलाड़ियों को कैसे संभालूंगा
1982-83 में श्रीलंका के खिलाफ खेले जाने वाले मैचों के लिए कपिल देव को भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया। कपिल देव ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया, जिसके चलते उन्हें 1983 विश्व कप के लिए भी भारतीय टीम का कप्तान बनाए रखा गया। कप्तानी को लेकर कपिल देव ने बताया था कि जब मैं 23-24 साल का था तब मुझे कप्तान बनाया गया था। मैं डरा हुआ था, क्योंकि मैं सोच रहा था कि मैं इन सीनियर खिलाड़ियों को कैसे संभालूंगा। लेकिन मैं खुश था क्योंकि चयनकर्ताओं को लगा कि मैं कप्तान बनने के काबिल हूं। पूर्व कप्तान ने खुलासा किया कि अपने ‘हीरो’ का नेतृत्व करना थोड़ा अजीब था। ‘मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था कि मैं कप्तान बन गया और मेरे हीरो मेरे अंडर खेल रहे थे। तो, वह बहुत कठिन समय था। मैंने केवल एक ही बात सोची थी कि मैदान पर मैं कप्तान हूं, लेकिन मैदान के बाहर वे सभी मेरे कप्तान हैं।
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