Kanpur: मोबाइल चलाने से बच्चे हो रहे गुस्सैल, छोटी-छोटी बात पर कर रहे गुस्सा, मां-पिता को काउंसलिंग की पड़ रही आवश्यकता

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Edited By Amrit Vichar
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Kanpur News कानपुर में मोबाइल चलाने से बच्चे गुस्सैल हो रहे।

Kanpur News कानपुर में मोबाइल चलाने से बच्चे गुस्सैल हो रहे। इससे मां-पिता को काउंसलिंग की आवश्यकता पड़ रही। बीते छह महीने में आए 57 काउंसलिंग के मामले सामने आये।

कानपुर, अमृत विचार। Kanpur News आज कल के आधुनिक युग में लोगों में तरह-तरह की दिमागी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसमें बच्चों में फोन चलाने की लत, माता-पिता को अपशब्द बोलना, शैक्षिक और कैरियर जैसी तमाम समस्याएं जन्म ले रही हैं। इससे उबरने के लिए लोग काउंसिलिंग का सहारा ले रहे हैं। शहर में मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में बीते छह माह में 57 मामले सामने आए हैं।

कैरिअर, बाल निर्देशन और शैक्षिक काउंसिलिंग का बड़ा फायदा यह है कि बच्चों, छात्रों और माता-पिता की मनोवैज्ञानिक संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। पढ़ाई करते वक्त बच्चे कई बार मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं। आईआईटी जैसे कई संस्थानों में छात्र-छात्राएं तनाव, अवसाद और डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर लेते हैं।

कछ बच्चे जो इलेक्ट्रानिक उपकरणों के लती हैं, वह अपना आपा खोकर माता-पिता को ही अपशब्द बोलने लगे हैं। मां-बाप कुछ सही सलह देते हैं तो बच्चों को वह गलत लगता है। काउंसलिंग के दौरान इस तरह की समस्याओं का सामना करने की विधि बताई जाती है। उन्हें सही तरह से गाइडेंस दिया जाता है।

माता-पिता नहीं समझ पाते बच्चों की रुचि

कई अभिभावक बच्चों की रुचि को नहीं समझना चाहते हैं। वे अपनी इच्छा अनुसार बच्चें को पढ़ाना चाहते है। कुछ अभिभावक तो बच्चों के जन्म पर ही सोच लेते हैं कि बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर, टीचर, वैज्ञानिक बनाएंगे। यह सोच सही नहीं है। बच्चों को पढ़ने का अवसर उनकी रुचि के अनुसार मिलना चाहिए।

जिस विषय में उनकी रुचि हो वही विषय उन्हें दिलाने चाहिए। काउंसलिंग के दौरान काउंसलर बच्चे से अच्छी तरह पूछते हैं कि किन विषयों में उसकी रुचि है। परवरिश यदि खुले दिमाग से की जाएगी तो काउंसलिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

मनोविज्ञान केंद्र में आने वाले केस

केस एक…
सकेत नगर क्षेत्र के अभिभावक ने अपने साथ अपनी बेटी की काउंसलिंग करा रहे हैं। अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी अपशब्द बोलती है। अपनी बात को मनवाने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाती है। उसकी हरकतों से मां-बाप भी चिढ़चिढ़े हो गए हैं। जिस कारण् तीनों अपनी काउंसलिंग बीते छह माह से करवा रहे हैं। 

केस दो…
फर्रुखाबाद निवासी एक पिता ने बताया उनकी बेटी को फोन में गेम खेलने की लत है। बेटी से फोन छीनो तो घर का सामान तोड़ती है, खाना पीना छोड़ देती है। जिससे अभिभावक परेशान हो गए हैं। वह बेटी के साथ अपनी काउंसलिंग बीते चार माह से करा रहे हैं।

माता-पिता को बच्चे के साथ समय बिताना चाहिए। बचपन से ही उसे फोन की लत नहीं डालनी चाहिए। इससे बच्चा बढ़ा होकर लती बनता है। बच्चे के साथ समय ज्यादा व्यतीत करना चाहिए।- डॉ संध्या शुक्ला, मंडलीय मनोचिकित्सक

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