निगरानी के लिए

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Edited By Amrit Vichar
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चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों को अग्रिम क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है और अक्साई चीन में संरचनाओं और हेलीपैड का निर्माण किया है। डेमचोक और गलवान में भी चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना जरूरी हो गया है। सेना को और मजबूत बनाने के लिए दो हजार से अधिक ड्रोन खरीदने का सरकार का फैसला समय की जरूरत है। इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन खरीदने से भारतीय सेना पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत और ताकतवर होगी। 

इसके अलावा सेना हिमालय में संचालित किए जाने वाले 1,000 निगरानी कॉप्टरों की भी मांग कर रही है। वास्तव में आने वाले समय में युद्ध तकनीक से लड़ा जाएगा और इसके लिए ड्रोन जैसे आधुनिक निगरानी सिस्टम को खरीदना बेहद जरूरी है। लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए लगभग 400 ड्रोन और विभिन्न प्रकार की निगरानी के लिए लगभग 1,500 ड्रोन खरीदे जा रहे हैं।

ड्रोन हथियार प्रणाली के साथ ही निगरानी के लिए भी बेहद जरूरी है। ड्रोन के जरिए बहुत सारे काम किए जा सकते हैं। इन ड्रोनों को उत्तरी सीमाओं में एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर निगरानी के लिए तैनात किया जाएगा, ताकि दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। खासकर चीन द्वारा बॉर्डर एरिया के आसपास निर्माण और दूसरी चीजों के बारे में नजर रखने में मदद मिलेगी। आदेश मिलने पर ड्रोन 90 मिनट से लेकर पांच-छह घंटे तक की उड़ानों के लिए है।
 
एक रसद ड्रोन लगभग 30 मिनट में बहुत कठिन पहाड़ी इलाकों में भी सबसे आगे की चौकियों तक पहुंच सकता है। गौरतलब है कि जून 2020 में लद्दाख में चीन के साथ हुई मुठभेड़ के बाद भारत ने ड्रोन खरीदना शुरू कर दिया था। अज़रबैजान-आर्मेनिया संघर्ष के दौरान ड्रोन ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, सऊदी अरब में अरामको की रिफाइनरियों एक ड्रोन हमले ने दिखाया कि वे कितने विनाशकारी हो सकते हैं। 

हाल ही में, रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखाया कि कैसे ड्रोन युद्ध को बदल रहे हैं। भारतीय सेना मानव शक्ति आधारित सेना से आधुनिक और तकनीक आधारित सेना में तब्दील हो रही है। इसे ज्यादा आत्मनिर्भर और कुशल लड़ाकू फोर्स का रूप दिया जा रहा है ताकि देश भविष्य में संघर्ष के विभिन्न आयामों से उभरती चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। अभी भी नई टेक्नॉलाजी का इस्तेमाल बढ़ाने की भरपूर गुंजाइश है। इसका इस्तेमाल हमें अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करने की जरूरत है ताकि हम भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।