रणनीतिक संपत्ति
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विकास की जो गति व उपलब्धि हासिल की है, वह असाधारण है,अभूतपूर्व है। दुनिया भारत की ओर देख रही है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन में कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की आवाज, भारत का संदेश, भारत की कही बात अलग ही मायने रखती है, भारत की ताकत आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली है। आज प्रवासी भारतीयों का पूरे विश्व में श्रेष्ठ योगदान है। ध्यान रहे वैश्विक स्तर पर सूचना तकनीक के क्षेत्र में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण भारत की विदेशों में छवि निखरी है। प्रवासी भारतीयों की सफलता के कारण भी आज भारत आर्थिक विश्व में महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।
48 देशों में रह रहे प्रवासियों की संख्या करीब दो करोड़ है। इनमें से 11 देशों में 5 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय वहां की औसत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और वहां की आर्थिक तथा राजनीतिक दशा व दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रवासियों की संख्या के मामले में भारत, मैक्सिको और चीन क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। पिछले 10 वर्षों में भारतीय प्रवासियों की संख्या में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। खाड़ी देशों में लगभग 8.5 मिलियन भारतीय रहते हैं, जो दुनिया में प्रवासियों का सबसे बड़ा संकेंद्रण है। इसके अतिरिक्त कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, मलेशिया, मारीशस, श्रीलंका, सिंगापुर, नेपाल सहित अन्य देशों में प्रवासी भारतीयों की बड़ी आबादी रहती है।
दुनिया की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी से लेकर अनेक देशों के कानून और अर्थव्यवस्था में निर्णय लेने वाली संस्थाओं का प्रमुख हिस्सा बनने में प्रवासी भारतीय कामयाब रहे हैं। प्रवासियों की सफलता का श्रेय उनकी परंपरागत सोच, सांस्कृतिक मूल्यों और शैक्षणिक योग्यता को दिया जा सकता है। वर्तमान सरकार ने प्रवासी भारतीयों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। भारतीय ‘ब्रेन-ड्रेन’ को ‘ब्रेन-गेन’ में बदलने के लिए केंद्र सरकार विदेश में बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में जाने वाले कामगारों के लिए ‘अधिकतम सुविधा’ और ‘न्यूनतम असुविधा‘ सुनिश्चित करना चाहती है।
महत्वपूर्ण है कि दूसरे देशों से मधुर संबंध बनाने में अप्रवासी बड़ी भूमिका निभाते हैं। प्रवासी भारतीयों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता एक वास्तविकता बन सकती है। राजनीतिक दबाव, राजनयिक स्तर की पैरवी के अलावा सुरक्षा परिषद की सदस्यता का समर्थन करने के लिए विभिन्न देशों में मौजूद प्रवासी भारतीय समुदाय का लाभ भारत उठा सकता है। सरकार को प्रवासी भारतीयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि वे भारत के लिए एक रणनीतिक संपत्ति हैं। जरुरी है कि प्रवासी भारतीयों द्वारा पूरे विश्व में किए गए श्रेष्ठ कार्यों का दस्तावेजीकरण किया जाए।
