बजट से उम्मीदें

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रतिकूल प्रभाव नजर आने लगे हैं। उच्च मुद्रास्फीति और धीमी विश्व आर्थिक वृद्धि के बीच 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने से भारत में भी महंगाई का दबाव काफी बढ़ चुका है। आर्थिक वृद्धि दर पर महंगाई का असर दिख भी चुका है। चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर घटकर सात प्रतिशत पर आने का अनुमान है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का यह महत्वपूर्ण आंकड़ा है,  क्योंकि इसी के आधार पर केंद्रीय बजट का प्रारूप तैयार करने की शुरुआत होती है। यह अनुमान सरकार के अनुमान आठ से 8.5 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है। हालांकि, यह भारतीय रिजर्व बैंक के 6.8 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। महत्वपूर्ण सवाल है कि आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि दर की नैया कैसे पार लगेगी। पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था की कमजोरी दूर करने का प्रयास किया है और खपत बढ़ाने पर जोर दिया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम बजट से पहले शुक्रवार को नीति आयोग में अर्थशास्त्रियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ बैठक करेंगे। उम्मीद है वह इस दौरान अर्थव्यवस्था की स्थिति और आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के उपायों पर चर्चा करेंगे। यह इस सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। इस वजह से लोगों की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। बजट को लेकर तमाम तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। साथ ही अपेक्षाएं भी की जा रही हैं। आगामी बजट में बड़े सुधारों की उम्मीद नहीं है। फिर भी सरकार को जनता के लिए सस्ती ऊर्जा और दैनिक आवश्यकताओं को सुनिश्चित करते हुए मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण रखते हुए पूंजीगत व्यय पर ध्यान देना जारी रखना चाहिए। 

सरकार ने कोरोना महामारी शुरू होने के बाद अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाया था। उसके बाद हर साल पूंजीगत व्यय में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है। इसका फायदा भी हुआ है। जब अमेरिका और इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है तब भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी अच्छी है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शुरू की जानी चाहिए। राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की दिशा में अधिक प्रयास करने से मध्यम अवधि में लाभ दिखेंगे। इससे महंगाई थामने में भी सहायता मिलेगी और निजी क्षेत्र से निवेश की गति भी तेज होगी। अर्थव्यवस्था को इससे रफ्तार मिलेगी।