असमानता की खाई

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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वैश्वीकरण के बाद भारत में अमीरी-गरीबी की खाई तेजी से गहरी हुई है। असमानता की खाई के बढ़ने का बड़ा कारण देश में संसाधनों का असमान वितरण है। संसाधनों के असमान वितरण से उपजी समस्या कितनी बड़ी है, इसका उदाहरण हाल ही में जारी ऑक्सफैम की रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट भारत में संसाधनों के असमान वितरण की पुष्टि करती है।

वर्ल्ड इकानॉमिक फोरम की बैठक से पहले आई ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि देश में आर्थिक गैरबराबरी बुरी तरह बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक केवल पांच फीसदी भारतीयों के पास देश की कुल संपत्ति का 60 फीसदी हिस्सा मौजूद है। साथ ही निचले पायदान पर मौजूद 50 फीसदी आबादी संपत्ति में केवल तीन फीसदी की हिस्सेदार है। कोविड काल में भी भारत के अमीरों का प्रदर्शन अच्छा रहा और 2020 से 2022 के बीच अरबपतियों की तादाद 102 से बढ़कर 166 हो गई। रिपोर्ट बताती है कि भारत के दस सबसे धनी लोगों पर पांच प्रतिशत कर लगाने से बच्चों को स्कूल वापस लाने के लिए पूरा धन मिल सकता है।

देश के अरबपतियों की पूरी संपत्ति पर दो फीसदी की दर से एकमुश्त कर लगाया जाए, तो अगले तीन साल तक कुपोषित लोगों के पोषण के लिए 40,423 करोड़ रुपये की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। यानि देश के सबसे अमीर नौ लोगों के पास देश के सबसे गरीब पचास प्रतिशत लोगों की कुल संपत्ति के बराबर संपत्ति है। कहा जा सकता है विकसित देशों के प्रभाव वाली इन संस्थाओं के ऐसी रिपोर्ट जारी करने के पीछे  निहित स्वार्थ होते हैं लेकिन फिर भी ये आंकड़े सामाजिक असमानता की तस्वीर तो दर्शाते ही हैं।

रिपोर्ट समावेश और बहिष्करण, दोनों ही स्थिति को प्रदर्शित करती है। असमानता पर उपलब्ध जानकारी, जिसे यह रिपोर्ट सामने लाती है, वह रणनीतियां बनाने, सामाजिक विकास और साझा खुशहाली के लिए रोडमैप तैयार करने में मददगार साबित होगी। अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी इस बात को साबित कर रही है कि देश में अमीरों के लिए ही तरक्की के अवसर हैं। अर्थव्यवस्था में लोगों के बीच के अंतर को कम करना इस समय की बड़ी जरूरत है।

असमानता कम करने के लिए गरीबों के लिए विशेष नीतियां बना कर उन्हें व्यावहारिक रूप दिए जाने की जरूरत है। अगले वर्ष आम चुनाव हैं। ऐसे में सरकार के पास अभी एक साल का समय है। सरकार को कम से कम इस वर्ष  के बजट को ऐसा बनाना चाहिए कि जिससे लगे कि सरकार वाकई में असमानता की खाई पाटने को संकल्पित है।