चीन की हताशा
चीन अपनी विस्तारवादी नीति के कारण हमेशा विवादों में रहा है। चीन की भौगोलिक सीमाएं 14 पड़ोसी देशों के साथ लगभग 22 हजार किलोमीटर तक लगती है। चीन का इन सभी 14 देशों के साथ सीमा विवाद रहा है। पूर्वी लद्दाख के पैंगांग झील के पास वर्ष 2020 की हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के बीच एलएसी पर तनाव है।
इस बीच आधिकारिक मीडिया ने शुक्रवार को जानकारी दी कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर तैनात सैनिकों के साथ बातचीत की है और उनकी युद्ध की तैयारियों का जायजा लिया है। दरअसल चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग दुनिया को अपनी श्रेष्ठता का एहसास कराने के लिए बेचैन हैं।
इन हालातों में राष्ट्रपति को भारत को निशाना बनाना सबसे आसान विकल्प लगता है। जिनपिंग घरेलू मोर्चे पर अपनी धाक बढ़ाने के लिए विदेश नीति को एक जरिए के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। विनाशकारी जीरो-कोविड नीति की वजह से उनके प्रशासन की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है। हताशा में जनता का ध्यान भटकाने और जनमत को विभाजित करने के उद्देश्य से युद्धोन्माद फैलाना उनका चालाकी
भरा पैंतरा लग सकता है। इसी के चलते सीमा पर चीनी सैनिकों का जमावड़ा बढ़ाया जा रहा है। वही भारत को भी आगे आकर सबकुछ दुरुस्त करना पड़ रहा है।
अब बार्डर पर हमारी सेना भी पर्याप्त संख्या में है। यानि लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर तक भारत को आंखें दिखा रहे चीन को जवाब देने के लिए भारत ने कमर कस ली है। लद्दाख में भारत ने आक्रामक नीति का परिचय दिया है, परिणामस्वरूप चीन भारत के रुख से बेहद परेशान है। सीमा पर लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच भारत ने कई मोर्चों पर किलेबंदी शुरू कर दी है।
सड़क, एयर स्ट्रिप, सुरंग से लेकर रक्षा के क्षेत्र में भी भारत लगातार खुद को मजबूत कर रहा है। पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध के संबंध में दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता के 17 दौर हो चुके हैं, लेकिन बाकी मुद्दों के समाधान में कोई खास प्रगति नहीं हुई।
भारत ने जोर दिया है कि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति जरूरी है। अभी भी इस विवाद का हल बातचीत से निकालने की कोशिश हो रही है। लिहाज़ा भारत को सीमा पर बार-बार और लंबे समय तक चलने वाले गतिरोधों, हिंसक झड़पों और टकरावों के लिए तैयार रहना होगा और सतर्कता बनाए रखना ही बेहतर है।
