बरेली: 6 सालों में महिलाओं पर बढ़ा अत्याचार, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा के मामले सर्वाधिक

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अफसरों का दावा, इनमें से स्थानीय स्तर पर निपटा दिए गए 2064 मामले

अभिषेक मिश्रा, बरेली, अमृत विचार। महिला सुरक्षा, सशक्तीकरण और विकास के तमाम दावों को सरकारी आंकड़े ही झुठला रहे हैं। इन आंकड़ों का बयान है कि पिछले छह सालों में जिले में महिला अपराध कम नहीं हुए बल्कि और बढ़े हैं। घर और बाहर दोनों जगह महिलाएं अत्याचार का जमकर शिकार हुई हैं।

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दुष्कर्म और घरेलू हिंसा के केस सर्वाधिक हैं। महिलाओं के प्रति अपराधों की भयावहता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सरकार को एक ही साल में पीड़ित महिलाओं को करीब नौ करोड़ की धनराशि मुआवजे के तौर पर अदा करनी पड़ी है।

सरकारी रिकॉर्ड बताता है कि वन स्टाप सेंटर पर पिछले 6 साल में घरेलू हिंसा के 919 केस पहुंचे जो सर्वाधिक हैं। इसके अलावा दहेज उत्पीड़न के 245, दुष्कर्म के 99, पॉक्सो एक्ट के 58 मामलों के साथ कुल 2110 केस रिकॉर्ड में दर्ज हुए। अफसरों का दावा है कि इनमें 2064 मामलों को निपटारा करा दिया गया। इनमें 47 मामले अब तक विचाराधीन हैं।

आंकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा और नाबालिग बच्चियों के साथ हुए अपराधों के मामले में 2018-19 का साल सर्वाधिक भयावह रहा जिसमें घरेलू हिंसा के 293 और नाबालिग बच्चियों के साथ हुई आपराधिक घटनाओं के बाद पॉक्सो एक्ट के सर्वाधिक 37 केस रिकॉर्ड हुए।

आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में दुष्कर्म के 3 केस, 2017-18 में सर्वाधिक 42 केस पहुंचे। 2018-19 में 26, 2019-20 में 9, 2021-22 में 8 केस रिकॉर्ड में शामिल किए गए। 2022-23 में दुष्कर्म का एक ही मामला सामने आया। घरेलू हिंसा के 2016-17 में 70, 2017-18 में 198, 2018-19 में 293, 2019-20 में 197, 2020-21 में 65, 2021-22 में 49 और 2022-23 में 47 मामले आए।

इसके अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत एक से 17 साल की बच्चियों पर अत्याचार के 2017-18 में 5 और 2018-19 में 37 केस दर्ज हुए। साल 2019 -20 में 11, 2020-21 में 3, 2021- 22 में 2 और 2022-23 में कोई केस नहीं आया। दहेज उत्पीड़न के 2016-17 में 1, 2017-18 में 33, 2018-19 में 59, 2019-20 में 81, 2020-21 में 23, 2021-22 में 23 और 2022-23 में अब तक 25 केस दर्ज हुए हैं।

भयावह तस्वीर : 5 साल... 224 पीड़ित... 8.73 करोड़ का मुआवजा
एक साल में 85 महिलाओं के साथ हुई क्रूरता के मामलों में 2. 55 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिए गए। 4 पॉक्सो एक्ट के 76 केसों में पीड़ित बच्चियों को बतौर मुआवजा 2 करोड़ 28 लाख, 6 पॉक्सो के तहत 18 पीड़ित बच्चियों को 54 लाख, सामूहिक दुष्कर्म की 36 पीड़िताओं को 2.52 करोड़ का मुआवजा दिया गया।

इसके अलावा तेजाब हमले की छह पीड़ितों को 30 लाख, हत्या के तीन मामलों में 30 लाख रुपये की मदद दी गई। कुल 8.73 करोड़ का मुआवजा पीड़ित महिलाओं को दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक महिला उत्पीड़न से जुड़े उन्हीं मामलों में आर्थिक सहायता मिलती हैं जिनमें पुलिस केस दर्ज कर विभाग को रिपोर्ट सौंपती है। गंभीर प्रकरणों की अलग-अलग धनराशि भी तय है। उसी के तहत सरकार से सहायता मिलती है।

ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को आर्थिक मदद दिलाने की कोशिश रहती है। 5 वित्तीय वर्षों में 8.73 करोड़ रुपये पीड़ितों को बतौर मुआवजा दिए जा चुके हैं। महिलाओं के प्रति अपराध न हों, इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है---नीता अहिरवार, डिप्टी डायरेक्टर/जिला प्रोबेशन अधिकारी।

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