लखनऊ: खून का काला कारोबार, ध्यान नहीं दिए तो फंसेंगे तीमारदार, एसएफडीए ने कहा होगी कार्रवाई
अमृत विचार लखनऊ। राजधानी में खून का काला कारोबार जारी है। दलालों की जड़े इतनी गहरी हैं कि अधिकारी डाल-डाल तो दलाल पात-पात हैं। इस बीच अगर तीमारदार जरा भी चूके तो वह खून के बदले क्या खरीद लेंगे इस बात की जानकारी भी उनकों नहीं होगी। ऐसे में कई डॉक्टर भी मानते हैं कि मरीजों के तीमारदार सतर्क रहें तो ज्यादा बेहतर है। हालांकि कानूनी तौर जानकार कहते हैं कि यदि खून किसी को चढ़ाया जाता है तो उसकी गुणवत्ता क्या है इसकी जिम्मेदारी डॉक्टर और सीएमओ की होगी।
एक काल पर ही डोनर खून देने के लिए राजी
राजधानी में प्रोफेशनल दलाल भी सक्रिय हैं जो एक कॉल पर ही खून देने को राजी हो जाते हैं। सरकारी संस्थानों में प्रोफेशनल डोनर दबोचे न जाए इसके लिए वह हर बार नए डोनर तैयार किया जाता है। दलाल एक यूनिट खून देने पर उन्हें दो-ढाई हजार रुपए देते हैं। बाकी हिस्सा अन्य दलाल व सौदा कराने वाले लोग बंदरबाट कर लेते हैं। लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी असली दलाल तक कभी पहुंच नहीं पाते हैं।
इन मेडिकल संस्थानों के पास दलालों की फौज
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर, लोहिया, पीजीआई समेत सरकारी संस्थानों के बाहर खून का काला कारोबार करने वाले दलाल मौजूद रहते हैं। यहां अलग-अलग गैंग के सरगना अपना नेटवर्क व्हाटसेप कॉलिंग के जरिए चलाते हैं। दलाल अपना व्हाटसेप ग्रुप भी सामाजिक सेवा नाम से बनाये रहते हैं। पूरा खेल सेटिंग पर चलता है। इस खेल में कई निजी अस्पताल भी शामिल हैं। जो बिना डोनर 7 से 8 हजार रुपए प्रति यूनिट खून दिलवा रहे हैं।
कुछ डॉक्टरों और दलालों का भी गठजोड़
ड्रग-एसटीएफ की संयुक्त टीमों ने बीते साल दूसरे राज्य से खून मंगाकर बेंचने वाले गैंग का पर्दाफाश किया था। इसमें दो ब्लड बैंकों को भी सीज किया गया था। कई अन्य ब्लड बैंकों पर छापा मारी हुई थी। इसमें एक डॉक्टर दंपति भी खून के अवैध कारोबार में शामिल होने का आरोप लगा था। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी एसटीएफ की रडार पर थे।
कोट.........
शिकायत मिलने पर ब्लड बैंकों पर कार्रवाई की जाती है। इस बार भी पता लगाया जा रहा है, दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी। ब्लड बैंक अगर जिम्मेदार पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होना तय है। रही बात ब्लड की गुणवत्ता की तो यदि तीमारदार बाहर से खरीदता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर की जिम्मेदारी है कि खून की जांच करवा ले।
बृजेश सिंह सहायक मंडल आयुक्त एफएसडीए
