वायरस की रफ्तार

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Edited By Amrit Vichar
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दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामलों की कुल संख्या बढ़कर एक करोड़ 90 लाख को पार कर गई है। देश में संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 62 हजार से अधिक नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 20.27 लाख और सक्रिय मामलों की संख्या छह लाख के …

दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामलों की कुल संख्या बढ़कर एक करोड़ 90 लाख को पार कर गई है। देश में संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 62 हजार से अधिक नए मामले सामने आने से संक्रमितों की संख्या 20.27 लाख और सक्रिय मामलों की संख्या छह लाख के पार हो गई है। इस महामारी से हुई मौतों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे, मेक्सिको तीसरे और ब्रिटेन चौथे स्थान पर है जबकि मृतकों की संख्या के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है। अब सबकी निगाहें कोरोना वायरस की वैक्सीन पर हैं। जिसे भारत समेत कई देश बनाने की कोशिश में हैं। कहा जा रहा है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन या दवा तैयार नहीं हो जाती तब तक महामारी भयावह रुप से बनी रहेगी। इसलिए हर देश, हर व्यक्ति इसी उम्मीद में है कि जल्दी ही वैक्सीन आए और महामारी से निजात मिले।

विश्व स्वास्थ्य संगठन कह चुका है कि कोरोना की कारगर दवा मिल पाना संभव नहीं है। ड्रग कंट्रोलर आफ इंडिया (डीसीजीआई) ने भारतीय सीरम संस्थान को आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन- कोविडशील्ड के मनुष्यों पर दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति दे दी है। उम्मीद की जा सकती है कि इस वैश्विक महामारी से बचाव की दिशा में बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। यह टीका ब्रिटेन के आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने दवा कंपनी एस्ट्रानेजेनका के साथ मिलकर तैयार किया है। भारत में इस पर तेजी से काम चल रहा है। मानव परीक्षण में कोविडशील्ड यदि खरा उतरा तो भारतीय सीरम संस्थान इसका उत्पादन कराएगा। भारत में बायोटेक व कैडिला के दो और टीकों पर पहले से ही परीक्षण चल रहे हैँ।

ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का अचूक दवा न मिल पाने का आकलन संदेह पैदा करता है। क्योंकि वैश्विक संस्था डब्ल्यूएचओ का काम बीमारियों व महामारियों के बारे में सदस्य देशों की सहायता करना है। समझा जाता है कि महामारी व दवा के बारे में डब्ल्यूएचओ ही सटीक सूचनाएं दे सकता है। अचूक दवा न मिल पाने का उसका आकलन चिकित्सा विज्ञान के लिए बड़ी चुनौती है। फिर भी निराश होकर बैठना उचित नहीं है। रुस ने दवा बनाने का दावा कर दिया है। अमेरिका व चीन जैसे देश भी सफलता के करीब बताए जा रहे हैं। आज के हालात में सिर्फ महामारी से बचाव के उपाय ही हमें बचा सकते हैं।