बरेली: 12 करोड़ का घोटाला, अधिकारी मानने को तैयार नहीं
बरेली,अमृत विचार। स्वच्छता मिशन में 12.34 करोड़ का घोटाला इन दिनों सुर्खियों में है। वहीं सिस्टम में बैठे कुछ अफसरों की मिलीभगत से हुए इस खेल पर पर्दा डालने की पुरजोर कोशिश जारी है। घोटाले के आरोप में निलंबित लिपिक बयान देने से बच रहा है। वहीं दूसरी तरफ जांच अधिकारी के तेवर भी बदल …
बरेली,अमृत विचार। स्वच्छता मिशन में 12.34 करोड़ का घोटाला इन दिनों सुर्खियों में है। वहीं सिस्टम में बैठे कुछ अफसरों की मिलीभगत से हुए इस खेल पर पर्दा डालने की पुरजोर कोशिश जारी है। घोटाले के आरोप में निलंबित लिपिक बयान देने से बच रहा है। वहीं दूसरी तरफ जांच अधिकारी के तेवर भी बदल गए हैं। वह घोटाला होने की बात नकार कर्मचारियों में आपसी मदभेद के कारण दस्तावेज में खामियां होने के चलते गड़बड़ी की बात कह रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दोषियों को बचाने को नया षडयंत्र रचा जा रहा है।
बता दें, वर्ष 2018-19 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में शौचालयों की धनराशि लाभार्थियों के बजाय सीधे प्रधानों के खाते में भेज दी गई थी। प्रधान ने सचिव और विभागीय कर्मियों से साठगांठ कर 10 हजार से ज्यादा शौचालयों को बनवाने की मिली करीब 12.34 करोड़ की रकम लाभार्थियों के बजाय अपात्रों को बांट दी थी। इतना ही नहीं घोटाला उजागर न हो इसलिए काफी समय तक इसकी डाटा फीडिंग भी नहीं कराई गई।
बीते नवंबर में अपात्रों को शौचालय देने की शिकायतें अफसरों से की गई लेकिन खेल उजागर न हो इसलिए शिकायतों पर पर्दा डाल दिया गया। तत्कालीन डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने सत्यापन में फर्जीवाड़ा पकड़ा तो हड़कंप मचा है। हालांकि फजीहत से बचने को एक लिपिक को निलंबित कर दिया था। क्वरंटीन होने की वजह से उसके बयान नहीं हो सके थे, लेकिन अब घर वापसी के बाद भी जांच अधिकारी द्वारा बुलाने पर भी आरोपी लिपिक बहानेबाजी कर बयान देने से बच रहा है।
जवाबदेही से बच रहे अफसर
डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके समय में ही इस घोटाले से पर्दा उठा तो एक बाबू को आनन-फानन में निलंबित कर दिया गया। लेकिन अब इनके स्थान पर किसी नए अफसर की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में जांच अधिकारी से लेकर विभाग के अन्य अफसर इस प्रकरण में चुप्पी साधे बैठे हैं।
“12 करोड़ का कोई घोटाला नहीं हुआ है। यह कर्मचारियों में मतभेद के कारण दस्तावेज में खामियां का मामला है। लिपिक को बयान देने के लिए बुलाया गया, लेकिन उसने कंटेनजोनमेंट क्षेत्र में होने की बात कहकर आने से इंकार दिया।” -धर्मेंद्र कुमार, जांच अधिकारी/ एडीपीआरओ
